एक नज़र में
- गोवा के विद्यार्थियों ने वेटलैंड बचाने और कंक्रीट पुलों के विरोध पर आधारित कहानी लिखी।
- बॉयन स्लैट ने महासागरों से प्लास्टिक हटाने की तकनीक विकसित की।
- गीतांजलि राव ने कम उम्र में पेयजल में लैड का पता लगाने वाली डिवाइस का कॉन्सेप्ट बनाया।
बच्चों में बिना यह सोचे सपने देखने की अद्भुत क्षमता होती है कि कोई विचार व्यावहारिक है या नहीं। वे ऐसी चीजों की कल्पना कर सकते हैं जो अभी अस्तित्व में नहीं हैं, जैसे उड़ने वाली स्कूल बस या प्रकृति की रक्षा से जुड़े विचार।
गोवा के चोराओ स्थित सेंट बार्थोलोम्यूज हाई स्कूल के सातवीं कक्षा के विद्यार्थियों ने एक लिटररी प्रोजेक्ट के तहत कहानी लिखी, जिसमें उन्होंने ब्रिज प्रोजेक्ट से खतरे में पड़े वेटलैंड को बचाने की मांग की। स्टूडेंट जेव्लिन रामोस ने कहा कि ऐसी जगहों पर पूरी तरह कंक्रीट पुल नहीं बनाने चाहिए जहां केकड़े और ऊदबिलाव रहते हों।
दुनिया भर में युवाओं ने अपने विचारों से असाधारण शुरुआत की है। डच टीनेजर बॉयन स्लैट ने समुद्र से प्लास्टिक हटाने के लिए 'द ओशन क्लीनअप' संगठन की नींव रखी, और अमेरिका में गीतांजलि राव ने 11 साल की उम्र में पेयजल में लैड का पता लगाने वाली डिवाइस का कॉन्सेप्ट ईजाद किया।
बच्चों को रेडीमेड जवाब देने के बजाय सवाल देने और उनके विचारों को सुनने की आवश्यकता है, जिससे वे अपनी कल्पना के अनुसार भविष्य का निर्माण कर सकें।
खबर का संदर्भ
यह लेख बच्चों की रचनात्मकता और उनकी कल्पनाओं के महत्व को रेखांकित करता है, जिसमें विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से यह बताया गया है कि बच्चों और युवाओं के छोटे प्रयास किस प्रकार बड़े बदलावों की शुरुआत बन सकते हैं।
EXPLAINED
आपके सवाल, सीधे जवाब
01. गोवा के छात्रों ने अपने प्रोजेक्ट में क्या लिखा?
उन्होंने एक कहानी लिखी जिसमें वे माता-पिता को पंचायत के पास जाकर ब्रिज प्रोजेक्ट से खतरे में पड़े वेटलैंड को बचाने की मांग करने के लिए मनाते हैं।
