लंदन में प्रवासी विरोधी रैली: 26 पुलिसकर्मी घायल, क्या है अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव? London March Turns Violent Robbins
International spotlight: लंदन में प्रवासी विरोधी रैली: 26 पुलिसकर्मी घायल, क्या है अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव? London…
जर्मनी में आयोजित 2026 फिडे फ्रीस्टाइल शतरंज विश्व चैंपियनशिप अपने चरम पर है, जहाँ विश्व चैंपियन मैग्नस कार्लसन और फैबियानो कारुआना के बीच खिताबी जंग होगी। कार्लसन ने सेमीफाइनल में नोदिरबेक अब्दुसत्तोरोव को 3-1 से हराया, जबकि कारुआना ने विंसेंट कीमर को 2.5-1.5 से मात दी। यह मुकाबला दोनों दिग्गजों की 2018 की पुरानी प्रतिद्वंद्विता को फिर से जीवंत करेगा। चैंपियनशिप में कुल $300,000 की इनामी राशि है, जिसमें विजेता को $100,000 मिलेंगे। भारत के अर्जुन एरिगैसी भी पांचवें स्थान के लिए हंस नीमन से भिड़ेंगे। रविवार को होने वाला यह फाइनल शतरंज प्रशंसकों के लिए बेहद रोमांचक होने वाला है।
अफगानिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान राशिद खान ने टी20 विश्व कप से टीम के लगभग बाहर होने पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने माना कि टीम ने अच्छा क्रिकेट खेला लेकिन भाग्य उनके साथ नहीं था। राशिद ने छोटे देशों को बड़ी टीमों, जैसे न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका, के खिलाफ नियमित द्विपक्षीय श्रृंखला खेलने के अधिक अवसर देने की वकालत की है। उनका तर्क है कि विश्व कप जैसे बड़े मंच पर सीधे शीर्ष टीमों का सामना करने से दबाव बढ़ता है और रणनीतियों को समझना मुश्किल हो जाता है। नियमित मुकाबले खेलने से ही अफगानिस्तान जैसी टीमें अपनी गलतियों से सीखकर बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगी।
वर्ष 2026 के संसदीय बजट सत्र में हंगामे और गतिरोध का बोलबाला रहा। लोकसभा में पहली बार प्रधानमंत्री राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब नहीं दे सके, जिससे अभिभाषण बिना चर्चा पारित हो गया। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में 97 मिनट का प्रभावशाली उत्तर दिया, जिसमें उन्होंने देश के विकास और भविष्य पर जोर दिया। सत्र के दौरान राहुल गांधी ने विषय से हटकर चीनी घुसपैठ का मुद्दा उठाया और लोकसभा अध्यक्ष के नियमों की अनदेखी की। कांग्रेस व इंडी गठबंधन की महिला सांसदों द्वारा प्रधानमंत्री का मार्ग अवरुद्ध करने की घटना भी हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी दलों पर राष्ट्रपति पद और एक आदिवासी महिला के अपमान का आरोप लगाते हुए कड़ी आलोचना की।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया है कि भारत अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ को लेकर प्रतिबद्ध है और रूसी तेल जैसी ऊर्जा खरीद के निर्णय ‘राजनीतिक दबाव’ के बजाय ‘लागत, जोखिम और उपलब्धता’ पर आधारित होंगे। म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय तेल कंपनियां अपने हितों के अनुसार फैसले लेती हैं। उन्होंने अमेरिकी दावों की पुष्टि या खंडन नहीं किया कि भारत रूसी तेल आयात कम करने पर सहमत हुआ है। यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत-अमेरिका के बीच व्यापार शुल्क में कमी आई है, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा रूसी तेल खरीद को लेकर लगाए गए शुल्क भी शामिल थे, जो भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को दर्शाता है।
आज महाशिवरात्रि का पावन पर्व है, जहाँ भक्तगण भगवान शिव की आराधना करते हैं। शिव पूजन में कुछ विशेष सामग्री वर्जित मानी गई हैं, जैसे तुलसी और केतकी का फूल। तुलसी को असुर जालंधर की पत्नी वृंदा की कथा से जोड़ा जाता है, जिसके सतीत्व भंग के बाद तुलसी का जन्म हुआ। वहीं, केतकी के फूल को ब्रह्मा जी के झूठ में साथ देने के कारण शिवजी ने शाप दिया था। इसके विपरीत, बेलपत्र, धतूरा, आक और भांग जैसी सामग्रियां शिवजी को अत्यंत प्रिय हैं। सही विधि और श्रद्धा से पूजन करने से भगवान शिव भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इन पौराणिक मान्यताओं को समझना शिव पूजन का महत्वपूर्ण अंग है।
महाशिवरात्रि पर्व पर उज्जैन का महाकाल मंदिर भक्तों के सैलाब से उमड़ पड़ा है। अभी तक डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन कर चुके हैं, और यह संख्या रविवार के कारण तेजी से बढ़ रही है, जिसमें 10 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। मध्य रात्रि 2:30 बजे मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही पूजा-अर्चना का दौर शुरू हुआ। भगवान को पंचामृत से अभिषेक कर भांग, चंदन और त्रिपुंड से ‘राजा स्वरूप’ शृंगार किया गया। तड़के हुई भस्म आरती में भक्तों ने अद्भुत दर्शन किए। मंदिर समिति के अनुसार, औसत 40 मिनट में दर्शन कराए जा रहे हैं, और महाकाल के कपाट लगभग 44 घंटे तक लगातार खुले रहेंगे।
यह लेख ‘खोजना’ और ‘ढूंढना’ के दार्शनिक अंतर से शुरू होकर आधुनिक एआई तकनीक के प्रभाव पर केंद्रित है। जहाँ भगवान को ‘ढूंढा’ जाता है, वहीं दुनिया की वस्तुओं को एआई की मदद से ‘खोजा’ जा रहा है। एआई की जड़ें एलन ट्यूरिंग के द्वितीय विश्व युद्ध के कार्यों में हैं, और यह आज ‘अप्राप्त’ को प्राप्त करने का एक शक्तिशाली उपकरण बन गया है। हालांकि इसके अनगिनत फायदे हैं, अनियंत्रित एआई एक ‘बड़ा विस्फोट’ साबित हो सकता है। लेख व्यक्तिगत अनुशासन और नीतिगत ‘लक्ष्मण रेखा’ खींचने की आवश्यकता पर जोर देता है, ताकि एआई के नकारात्मक प्रभाव (रावण) हमारी शांति और मूल्यों (सीता) को नुकसान न पहुँचा सकें। यह राष्ट्रीय और व्यक्तिगत स्तर पर सावधानीपूर्वक नियमन का आह्वान करता है।
वैश्विक स्तर पर शराब के सेवन में उल्लेखनीय गिरावट देखी जा रही है। अमेरिका में गैलप सर्वेक्षण के अनुसार, 2025 में शराब पीने वालों का प्रतिशत 90 वर्षों में सबसे कम था, जबकि यूरोप में भी अधिकांश उपभोक्ता कम शराब पी रहे हैं या छोड़ रहे हैं। हालांकि भारत में बिक्री बढ़ रही है, प्रति व्यक्ति खपत पश्चिमी देशों से कम है और शहरी क्षेत्रों में बदलाव के संकेत दिख रहे हैं। इस बदलाव के मुख्य कारण हैं बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता, जहाँ लोग ‘वेलनेस’ को प्राथमिकता दे रहे हैं, और सोशल मीडिया के युग में बढ़ती सामाजिक निगरानी, जहाँ सार्वजनिक व्यवहार के वीडियो वायरल होने का डर लोगों को जिम्मेदार रहने के लिए प्रेरित कर रहा है, जिससे सामाजिक प्रतिष्ठा या नौकरी खोने का जोखिम कम हो।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की पर रूस के साथ तत्काल समझौता करने का दबाव फिर से बढ़ा दिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ज़ेलेंस्की ने जल्द ही कदम नहीं उठाया तो यूक्रेन एक बड़ा अवसर खो देगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अगले सप्ताह जिनेवा में दोनों देशों के बीच नई शांति वार्ताएँ होने वाली हैं। पिछली वार्ताएँ, जो अबू धाबी में हुई थीं, यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र के भविष्य जैसे प्रमुख मुद्दों को सुलझाने में विफल रही थीं, जिसका अधिकांश हिस्सा अभी भी रूस के नियंत्रण में है। ट्रंप ज़ेलेंस्की पर समझौता टालने का आरोप लगाते रहे हैं।
वर्तमान में लोकतांत्रिक सरकारों पर जनता का भरोसा ऐतिहासिक न्यूनतम स्तर पर है, जबकि सिंगापुर और यूएई जैसी टेक्नोक्रेटिक सरकारें उच्च विश्वास का आनंद ले रही हैं। डॉ. सामी महरूम के कॉलम के अनुसार, जहाँ एक ओर एआई को गलत सूचना का वाहक माना जा रहा है, वहीं यह जनता का विश्वास पुनः स्थापित करने में भी सक्षम हो सकता है। पश्चिमी लोकतंत्रों में नीति-निर्माण अक्सर दक्षता और राजनीतिक व्यवहार्यता के बीच फंसा रहता है, जबकि सफल टेक्नोक्रेटिक मॉडल जनता की संतुष्टि को प्राथमिकता देते हैं। एआई बड़े डेटा का विश्लेषण कर, जनभावना और विशेषज्ञ राय को एकीकृत करके अधिक तर्कसंगत, पारदर्शी और जन-स्वीकार्य नीतियां बनाने में सरकारों की मदद कर सकता है। यह नीति-निर्माण को कुशल बनाकर और मिथ्या सूचनाओं पर अंकुश लगाकर लोकतंत्रों में जनता का भरोसा लौटाने की कुंजी बन सकता है।