एक नज़र में
- भारत अपनी जीवाश्म ईंधन की जरूरतों का 85 प्रतिशत से अधिक आयात करता है।
- सितंबर 2026 में आयातित कच्चे तेल की कीमत 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी।
- ईरान पर हमले से भारत के चालू खाता घाटे और आयात बिल पर असर पड़ सकता है।
दैनिक भास्कर पॉलिटिक्स में प्रकाशित सचिन कलबाग के कॉलम के अनुसार, अमेरिका के ईरान पर संभावित हमले से वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत पर गंभीर असर पड़ सकता है। भारत अपनी जीवाश्म ईंधन की जरूरतों का 85 प्रतिशत से अधिक आयात करता है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में कच्चे तेल की औसत कीमत 62 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अगस्त 2026 में 90 डॉलर और सितंबर में 116 डॉलर प्रति बैरल हो गई।
ईरान पर किसी भीषण हमले से भारत का चालू खाता घाटा बढ़ सकता है और आयात बिल में 35 से 40 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा रुपए के कमजोर होने का खतरा भी बना हुआ है। अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा डीजल पर निर्भर होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम बढ़ने से देश में भी कीमतें प्रभावित हो सकती हैं।
भारत ने अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभावों से निपटने के लिए रूस के साथ मल्टी-करंसी व्यापार और गैर-पश्चिमी समुद्री परिवहन सेवाओं जैसे तरीके अपनाए हैं। इसके साथ ही ऊर्जा बाजारों से खुद को अलग करने के लिए एथेनॉल मिश्रण, सौर ऊर्जा क्षमता और घरेलू तेल भंडारों को बढ़ाने पर जोर देने की बात कही गई है।
खबर का संदर्भ
यह कॉलम अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक घटनाओं और ईरान पर संभावित हमलों के मद्देनजर भारत की ऊर्जा सुरक्षा, चालू खाता घाटे और आर्थिक चुनौतियों का विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
EXPLAINED
आपके सवाल, सीधे जवाब
01. भारत अपनी कुल जीवाश्म ईंधन जरूरत का कितना हिस्सा आयात करता है?
भारत अपनी जीवाश्म ईंधन की जरूरतों का 85% से अधिक आयात करता है।
02. भारत ने अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभाव से निपटने के लिए क्या उपाय अपनाए हैं?
भारत ने रूस के साथ मल्टी-करंसी व्यापार और गैर-पश्चिमी समुद्री परिवहन व निजी बीमा समूहों पर निर्भरता जैसे उपाय अपनाए हैं।
