एक नज़र में
- आईटी मंत्रालय ने ई-मुद्रा सुरक्षा सेंध की जांच के लिए विशेष टीम बनाई।
- भारतीय डिजिटल हस्ताक्षर और ई-हस्ताक्षर सेवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं।
- सर्ट-इन ने परामर्श जारी किया और टेक कंपनियों ने प्रभावित कोड ब्लॉक किए।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने डिजिटल प्रमाणपत्र जारी करने वाली कंपनी ई-मुद्रा में सुरक्षा संबंधी घटना की जांच के लिए एक विशेष दल का गठन किया है। मंत्रालय के अनुसार इस घटना का असर भारतीय वेबसाइटों और ऐप्स पर बहुत सीमित या नगण्य रहा है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह घटना मुख्य रूप से ई-मुद्रा के वैश्विक डिजिटल प्रमाणपत्र कारोबार से जुड़ी है। इसके तहत भारतीय प्रमाणन प्राधिकरण के नियमन में आने वाले डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र और ई-हस्ताक्षर सेवाएं पूरी तरह से सुरक्षित और अप्रभावित हैं।
कंपनी ने जानकारी दी है कि प्रणाली में तकनीकी खराबी के कारण कुछ कमजोर सुरक्षा कोड बन गए थे। एक शोधकर्ता ने एप्पल, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मोजिला जैसी कंपनियों को सतर्क किया था कि एआई की मदद से इन कमजोर कोड का विश्लेषण किया जा सकता है, जिसके बाद टेक कंपनियों ने इन्हें ब्लॉक कर दिया।
कंपनी का कहना है कि उसका मुख्य सिस्टम सुरक्षित है और किसी भी ग्राहक का डेटा चोरी नहीं हुआ है। भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल (सर्ट-इन) ने भी इस संबंध में परामर्श जारी किया है और सरकार ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।
खबर का संदर्भ
यह घटना डिजिटल सुरक्षा और प्रमाणपत्र जारी करने वाली प्रणालियों में तकनीकी खामियों और वैश्विक स्तर पर उनके प्रभावों को दर्शाती है।
EXPLAINED
आपके सवाल, सीधे जवाब
01. ई-मुद्रा मामले की जांच कौन कर रहा है?
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा गठित विशेष दल और सर्ट-इन इसकी जांच कर रहे हैं।
02. क्या भारतीय सेवाओं पर इसका असर पड़ा है?
सरकार और मंत्रालय के अनुसार भारतीय वेबसाइटों और ऐप्स पर इसका असर बहुत सीमित है और घरेलू डिजिटल हस्ताक्षर सेवाएं सुरक्षित हैं।
