एक नज़र में
- आठ साल में कामकाज से जुड़ने वाली महिलाओं की संख्या बढ़कर 20 करोड़ के पार पहुंची।
- महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले प्रतिदिन 70 मिनट कम आराम मिल रहा है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में महिला कामगारों की भागीदारी 23.7% से बढ़कर 44.9% हुई।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, देश में कामकाज से जुड़ने वाली महिलाओं की संख्या आठ साल में दोगुनी होकर 20 करोड़ के पार पहुंच गई है। हालांकि, बाहर नौकरी और आजीविका की जिम्मेदारी बढ़ने के बावजूद घर और बच्चों की देखभाल में पुरुषों का सहयोग नहीं बढ़ा है, जिससे महिलाओं पर दोहरा बोझ आ गया है।
घर और बाहर के काम संभालने के कारण महिलाओं को आराम, नींद और खुद के लिए पुरुषों के मुकाबले प्रतिदिन 70 मिनट कम समय मिल पा रहा है। शहरी इलाकों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में कामकाजी महिलाओं की संख्या में अधिक उछाल आया है, जहां ग्रामीण महिला कामगारों की भागीदारी 23.7 प्रतिशत से बढ़कर 44.9 प्रतिशत हो गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाली 73.3 प्रतिशत महिलाएं कृषि से जुड़ी हैं, जबकि इस क्षेत्र में पुरुषों की हिस्सेदारी 47.2 प्रतिशत है। इसके अलावा, काम से जुड़ने वाली महिलाओं की संख्या में बड़ा हिस्सा बिना वेतन या पारिवारिक कामकाज का है, और नियमित व सुरक्षित नौकरी का अनुपात महिलाओं में कम हुआ है।
खबर का संदर्भ
रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं की कामकाजी भागीदारी में वृद्धि तो हुई है, परंतु बिना वेतन वाले कार्यों की अधिकता और मजदूरी में अंतर अभी भी प्रमुख चुनौतियां बनी हुई हैं।
EXPLAINED
आपके सवाल, सीधे जवाब
01. कामकाजी महिलाओं की संख्या में कितनी वृद्धि हुई है?
आठ साल में कामकाज से जुड़ने वाली महिलाओं की संख्या दोगुनी होकर 20 करोड़ के पार पहुंच गई है।
02. ग्रामीण क्षेत्रों में महिला कामगारों की भागीदारी कितनी हो गई है?
ग्रामीण क्षेत्रों में महिला कामगारों की भागीदारी बढ़कर 44.9 प्रतिशत हो गई है।
