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लोकसभा: राहुल गांधी की स्पीच पर हंगामा, असंसदीय शब्दों पर आपत्ति

राष्ट्रीय
📅 29 जुलाई 2026 | SadhnaNEWS Desk

लोकसभा: राहुल गांधी की स्पीच पर हंगामा, असंसदीय शब्दों पर आपत्ति - SadhnaNEWS Hindi News


🔑 मुख्य बातें

  • राहुल गांधी ने पेपर लीक बिल पर बोलते हुए ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया, जिससे सदन में हंगामा हुआ।
  • स्पीकर ओम बिरला ने 11 बार और किरेन रिजिजू ने 7 बार राहुल को असंसदीय शब्दों के लिए टोका, माफी की मांग की।
  • राहुल ने छात्रों के प्रदर्शन का बचाव किया और कहा कि वे केवल अपनी आवाज उठा रहे थे, जिसमें गुस्सा या नफरत नहीं थी।

नई दिल्ली: बुधवार, 29 जुलाई 2026 को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पेपर लीक से जुड़े बिल पर 50 मिनट की स्पीच दी, जिसके दौरान सदन में जमकर हंगामा हुआ। उन्होंने अपने भाषण में ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। इस विवाद के बीच भी, पेपर लीक से संबंधित यह महत्वपूर्ण बिल हंगामे के बीच लोकसभा से पारित हो गया, जो देश के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी को 7 बार खड़े होकर टोका और संसदीय नियमों का हवाला देते हुए माफी मांगने की मांग की। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी राहुल को 11 से अधिक बार टोका, यह स्पष्ट करते हुए कि ऐसे असंसदीय शब्दों का प्रयोग सदन में स्वीकार्य नहीं है। राहुल गांधी ने इन आपत्तियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर सरकार चाहती है कि देश में सिर्फ बीजेपी बोले तो वह चुप होकर बैठ जाएंगे, जिससे बहस और गरमा गई।

राहुल गांधी ने अपने भाषण में छात्रों के प्रदर्शन का भी बचाव किया, यह कहते हुए कि देश का भविष्य सड़कों पर उतरा है, लेकिन उनके प्रदर्शन में गुस्सा या नफरत नहीं थी, वे केवल अपनी आवाज उठा रहे थे। उन्होंने भाजपा के सदस्यों से अपने बच्चों से पूछने का आग्रह किया कि वे इन प्रदर्शनों के बारे में क्या सोचते हैं, यह सुझाव देते हुए कि उन्हें अपने बच्चों का भी समर्थन ही मिलेगा। यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर छात्रों की चिंताओं को उजागर करता है।

यह बिल पर लगातार दूसरे दिन की चर्चा थी, मंगलवार को इस पर 9 घंटे की बहस हुई थी, जिसमें केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने सरकार का पक्ष रखा था। विपक्ष की ओर से गौरव गोगोई और प्रियंका गांधी जैसे नेताओं ने भी अपनी बात रखी। यह घटनाक्रम भारत की संसदीय राजनीति में बढ़ते तनाव और संवाद की चुनौतियों को दर्शाता है, जहां सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस आम हो गई है।

इस पूरे घटनाक्रम ने संसदीय मर्यादा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच की रेखा पर एक नई बहस छेड़ दी है। यह महत्वपूर्ण है कि देश के लोकतांत्रिक संस्थानों में संवाद सम्मानजनक बना रहे, भले ही विचारों में कितनी भी भिन्नता क्यों न हो। प्रधानमंत्री और सरकार को भी इस पर ध्यान देना चाहिए ताकि राष्ट्रीय मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो सके।

🔍 खबर का विश्लेषण

यह घटना भारतीय संसद में बढ़ती राजनीतिक कटुता और संवाद की चुनौतियों को दर्शाती है। विपक्ष के नेता द्वारा असंसदीय शब्दों का प्रयोग और उस पर सत्ता पक्ष की तीखी प्रतिक्रिया, दोनों ही संसदीय मर्यादा के लिए चिंताजनक हैं। यह दिखाता है कि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर भी सार्थक बहस के बजाय व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप हावी हो रहे हैं। यह घटना देश के लोकतांत्रिक संस्थानों की गरिमा बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देती है, जहां सरकार और विपक्ष दोनों को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन सम्मानजनक तरीके से करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

❓ राहुल गांधी ने लोकसभा में किस विषय पर भाषण दिया?

राहुल गांधी ने लोकसभा में पेपर लीक से संबंधित बिल पर 50 मिनट का भाषण दिया। उन्होंने इस दौरान छात्रों के भविष्य और उनकी चिंताओं को उठाया, साथ ही सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए।

❓ राहुल गांधी के भाषण के दौरान क्या विवाद हुआ?

राहुल गांधी ने अपने भाषण में ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। इसे असंसदीय मानते हुए हंगामा हुआ और माफी की मांग की गई।

❓ स्पीकर ओम बिरला और किरेन रिजिजू ने क्या प्रतिक्रिया दी?

स्पीकर ओम बिरला ने राहुल गांधी को 11 से अधिक बार टोका, जबकि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 7 बार खड़े होकर माफी मांगने को कहा। उन्होंने असंसदीय शब्दों के प्रयोग पर आपत्ति जताई।

❓ राहुल गांधी ने अपने शब्दों का बचाव कैसे किया?

राहुल गांधी ने कहा कि अगर सरकार चाहती है कि देश में सिर्फ बीजेपी बोले तो वह चुप होकर बैठ जाएंगे। उन्होंने छात्रों के प्रदर्शन को उनकी आवाज उठाने का तरीका बताया, जिसमें गुस्सा नहीं था।

❓ पेपर लीक बिल पर लोकसभा में क्या स्थिति रही?

पेपर लीक से जुड़े बिल पर लोकसभा में लगातार दूसरे दिन चर्चा हुई। हंगामे और विपक्ष के विरोध के बावजूद, यह बिल अंततः लोकसभा से पारित कर दिया गया, जिससे सरकार का पक्ष मजबूत हुआ।

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Source: Agency Inputs
 |  Published: 29 जुलाई 2026

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