📅 18 जुलाई 2026 | SadhnaNEWS Desk
🔑 मुख्य बातें
- मुख्यमंत्री धामी ने हरेला उत्सव में 10 लाख पौधे लगाने के अभियान से जुड़ने का आह्वान किया, जो पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है।
- हरेला पर्व उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, सामाजिक समरसता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का महापर्व है।
- यह अभियान राज्य की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर हरित भारत के लक्ष्य को भी मजबूत करेगा।
देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को परेड ग्राउंड में आयोजित लोक संवर्धन पर्व के अंतर्गत हरेला उत्सव में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं दीं और 10 लाख पौधे लगाने के महत्वाकांक्षी अभियान से जुड़ने का आह्वान किया। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
मुख्यमंत्री धामी ने जोर देकर कहा कि हरेला पर्व केवल हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संदेश ही नहीं देता, बल्कि यह उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, सामाजिक समरसता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भी प्रतीक है। उन्होंने इसे लोक परंपराओं का महापर्व बताया जो समाज के सभी वर्गों को एक सूत्र में पिरोता है। यह पर्व भारत की विविधता में एकता की भावना का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करता है।
मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त की कि प्रदेश का अल्पसंख्यक समाज भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इस पर्व में सहभागी बन रहा है। उन्होंने कहा कि यह उत्तराखंड की साझा सांस्कृतिक विरासत और ‘विविधता में एकता’ की भावना का सबसे सशक्त उदाहरण है। लोक संवर्धन पर्व के माध्यम से राज्य की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं को नई पहचान मिल रही है, जो देश भर में एक सकारात्मक संदेश भेजता है।
धामी ने प्रसिद्ध लोकगायक एवं ‘गढ़ रत्न’ नरेंद्र सिंह नेगी के योगदान का विशेष उल्लेख किया, जिन्होंने अपने गीतों के माध्यम से उत्तराखंड की संस्कृति, लोकजीवन, पर्यावरण, महिलाओं के संघर्ष और सामाजिक सरोकारों को देश-दुनिया तक पहुंचाया है। यह अभियान न केवल पर्यावरण को बेहतर बनाएगा बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी उत्तराखंड की पहचान को मजबूत करेगा। सरकार का यह प्रयास देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है।
उत्तराखंड सरकार का यह 10 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और जैव विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री धामी ने सभी नागरिकों से इस राष्ट्रीय महत्व के अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया। यह पहल भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक हरित और स्वस्थ भारत बनाने के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को भी बल देती है।
🔍 खबर का विश्लेषण
यह खबर उत्तराखंड सरकार की पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। 10 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य न केवल राज्य के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में मदद करेगा, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर हरित भारत के निर्माण में भी एक महत्वपूर्ण योगदान है। हरेला पर्व के माध्यम से इस अभियान को जोड़ना सांस्कृतिक और पर्यावरणीय मूल्यों के एकीकरण का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह पहल स्थानीय समुदायों को एक बड़े राष्ट्रीय उद्देश्य से जोड़ती है, जिससे सामाजिक भागीदारी और जागरूकता बढ़ती है। यह देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल प्रस्तुत करता है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ उत्तराखंड में कौन सा अभियान शुरू किया गया है?
उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरेला उत्सव के अवसर पर 10 लाख पौधे लगाने का एक महत्वाकांक्षी अभियान शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य राज्य में हरियाली बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है, जिससे राष्ट्रीय पर्यावरण लक्ष्यों को बल मिलेगा।
❓ हरेला पर्व का क्या महत्व है?
हरेला पर्व उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, सामाजिक समरसता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। यह पर्व हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है, साथ ही समाज के सभी वर्गों को एक सूत्र में बांधता है, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है।
❓ मुख्यमंत्री धामी ने किस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की?
मुख्यमंत्री धामी ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि प्रदेश का अल्पसंख्यक समाज भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ हरेला पर्व में सहभागी बन रहा है। उन्होंने इसे उत्तराखंड की साझा सांस्कृतिक विरासत और ‘विविधता में एकता’ की भावना का सशक्त उदाहरण बताया।
❓ लोक संवर्धन पर्व का उद्देश्य क्या है?
लोक संवर्धन पर्व का उद्देश्य राज्य की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं को नई पहचान दिलाना है। इसके माध्यम से उत्तराखंड के सामाजिक सरोकारों को देश-दुनिया तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलता है।
❓ इस अभियान से राष्ट्रीय स्तर पर क्या लाभ होगा?
इस अभियान से राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को मजबूती मिलेगी और हरित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। यह पहल देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बन सकती है, जिससे पूरे भारत में पर्यावरण जागरूकता और वृक्षारोपण को बढ़ावा मिलेगा।
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Source: Agency Inputs
| Published: 18 जुलाई 2026
