एक नज़र में
- सुधा मूर्ति ने संयुक्त राष्ट्र में अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ रोकने की वकालत की।
- भारत ने बाह्य अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ रोकने के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौते का समर्थन किया।
- भारत अपने गगनयान कार्यक्रम और राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की तैयारी कर रहा है।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में जोर दिया है कि बाह्य अंतरिक्ष को संघर्ष के बजाय सहयोग का क्षेत्र बनाया जाना चाहिए। सांसद सुधा मूर्ति ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति में भारत का पक्ष रखते हुए बाह्य अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ रोकने के लिए एक कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता किए जाने का आग्रह किया।
सुधा मूर्ति ने कहा कि भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में एक प्रमुख देश है और हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रम का संबंध विकास तथा सुरक्षा दोनों से है। उन्होंने एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य की बात दोहराते हुए कहा कि अंतरिक्ष हम सभी का है।
भारत ने निरस्त्रीकरण सम्मेलन में बहुपक्षीय बातचीत के जरिए ऐसे समझौते का समर्थन किया है जो सभी देशों को स्वीकार्य हो। मूर्ति ने यह भी स्पष्ट किया कि पारदर्शिता और विश्वास बढ़ाने वाले उपाय कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौते के पूरक हो सकते हैं, लेकिन उसका विकल्प नहीं बन सकते।
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने अंतरिक्ष में भारत की उपलब्धियों और भविष्य के लक्ष्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने 2023 में चंद्रमा पर अंतरिक्ष यान उतारने का उल्लेख करते हुए गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन बनाने के लक्ष्यों के बारे में बताया।
खबर का संदर्भ
यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति में भारत के आधिकारिक रुख को दर्शाती है, जहाँ सांसद सुधा मूर्ति ने अंतरिक्ष सुरक्षा और हथियारों की रोक पर भारत के दृष्टिकोण को रखा।
EXPLAINED
आपके सवाल, सीधे जवाब
01. संयुक्त राष्ट्र में बाह्य अंतरिक्ष के मुद्दे पर भारत का पक्ष किसने रखा?
सांसद सुधा मूर्ति ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति में भारत का पक्ष रखा।
02. भारत के भविष्य के अंतरिक्ष लक्ष्य क्या हैं?
भारत का लक्ष्य मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम गगनयान की तैयारी करना और अपना राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन बनाना है।
