एक नज़र में
- धनतेरस का पर्व भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है।
- समुद्र मंथन के दौरान चौदह दिव्य रत्न निकले थे।
धनतेरस का पर्व हर साल दीपावली से दो दिन पहले त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन को भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, देवताओं और असुरों द्वारा अमरता पाने के लिए क्षीर सागर में समुद्र मंथन किया गया था, जिससे चौदह दिव्य रत्न निकले थे।
समुद्र मंथन से सबसे पहले हलाहल विष निकला था, जिसे महादेव ने अपने कंठ में धारण किया और नीलकंठ कहलाए। इसके बाद कामधेनु गाय, सात मुख वाला उच्चैःश्रवा घोड़ा, सफेद ऐरावत हाथी, कौस्तुभ मणि और कल्पवृक्ष प्रकट हुए।
आगे की श्रृंखला में अप्सरा रंभा, धन और वैभव की देवी महालक्ष्मी, वारुणी मदिरा, चंद्रमा, शारंग धनुष और पांचजन्य शंख निकले। अंत में तेरहवें रत्न के रूप में भगवान धन्वंतरि अमृत कलश के साथ अवतरित हुए, जिन्हें आयुर्वेद का जनक भी माना जाता है।
खबर का संदर्भ
यह लेख हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन और धनतेरस के पर्व के बीच के धार्मिक संबंधों पर आधारित है।
EXPLAINED
आपके सवाल, सीधे जवाब
01. धनतेरस का पर्व कब मनाया जाता है?
यह पर्व दीपावली के ठीक दो दिन पहले त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है।
02. भगवान धन्वंतरि किसके जनक माने जाते हैं?
भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का जनक माना जाता है।
