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श्रीरामचरितमानस में रावण के जन्म, भाइयों की तपस्या और वरदान की कथा

लेखक: admin · प्रकाशित:
धर्मSadhnaNEWS Explained

साधना न्यूज़ डेस्क2 मिनट में पढ़ें

एक नज़र में

  • राजा प्रतापभानु शाप के कारण अगले जन्म में रावण के रूप में उत्पन्न हुए।
  • तीनों भाइयों ने कठोर तपस्या कर ब्रह्माजी से अलग-अलग वरदान माँगे।
  • रावण ने अमरता का वरदान न मिलने पर मनुष्य और वानर को छोड़कर अजेय होने की इच्छा जताई।

श्रीरामचरितमानस के बालकाण्ड के अनुसार, राजा प्रतापभानु अपने परिवार और साथियों सहित राक्षस योनि में उत्पन्न हुए। ब्राह्मणों के शाप के प्रभाव से वही राजा आगे चलकर रावण बना। रावण का जन्म महर्षि पुलस्त्य के वंश में पिता विश्रवा और माता कैकसी के यहाँ हुआ था।

तुलसीदासजी के वर्णन के अनुसार प्रतापभानु का छोटा भाई अरिमर्दन कुंभकर्ण बना और मंत्री धर्मरुचि विभीषण के रूप में जन्मे। एक ही कुल में जन्म लेने के बावजूद तीनों भाइयों के स्वभाव और जीवन-दृष्टि में भिन्नता थी जहाँ रावण अहंकारी बना, कुंभकर्ण बलशाली हुआ और विभीषण भगवान विष्णु के भक्त बने।

तीनों भाइयों ने अत्यंत कठोर तपस्या करके ब्रह्माजी को प्रसन्न किया। रावण ने ऐसा वरदान माँगा जिससे मनुष्य और वानर को छोड़कर कोई अन्य उसका वध न कर सके। उसने अपनी मृत्यु के लिए उन्हें अत्यंत तुच्छ माना।

कुंभकर्ण की प्रकृति और संभावित परिणामों को देखते हुए उसकी बुद्धि फेर दी गई, जिसके परिणामस्वरूप उसने छह महीने सोने का वरदान माँगा। वहीं विभीषण ने सांसारिक शक्ति या अजेयता की अपेक्षा भगवान के चरणों के प्रति निर्मल भक्ति माँगी।

तपस्या और वरदान से शक्ति और सामर्थ्य तो मिल सकता है, किंतु विवेक और धर्म के बिना यह विनाश का कारण बनता है। रावण का जीवन इसका उदाहरण है, जबकि विभीषण ने कठिन परिस्थितियों में भी धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा।

खबर का संदर्भ

यह प्रसंग श्रीरामचरितमानस के आधार पर रावण के जन्म, उसके भाइयों की तपस्या और उनके द्वारा माँगे गए वरदानों का धार्मिक विवरण प्रस्तुत करता है। कथा के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि कुल या जन्म से अधिक मनुष्य के कर्म, विचार और विवेक उसके चरित्र को निर्धारित करते हैं।

EXPLAINED

आपके सवाल, सीधे जवाब

01. रावण के माता-पिता कौन थे?

रावण के पिता विश्रवा ऋषि और माता कैकसी थीं।

02. विभीषण पूर्व जन्म में कौन थे?

विभीषण पूर्व जन्म में राजा प्रतापभानु के मंत्री धर्मरुचि थे।

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