एक नज़र में
- घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की मजबूती से भारतीय अर्थव्यवस्था को समर्थन मिला है।
- अगस्त महीने में एफडीआई, ईसीबी और विदेश से भेजे गए धन के प्रवाह में मजबूती आई।
- वैश्विक तनाव के चलते सितंबर और अक्टूबर में शेयर बाजारों में ज्यादातर गिरावट का रुख रहा।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अक्टूबर बुलेटिन में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट और आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं जैसी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद अर्थव्यवस्था को सहारा दे रही है।
लेख में बताया गया है कि ऊर्जा का शुद्ध आयातक होने के बावजूद देश में मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की बदौलत सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि को बल मिला है। हालांकि, खुदरा महंगाई में हाल ही में बढ़ोतरी देखी गई है।
विदेशी मोर्चे पर, एफसीएनआर (बी) अदला-बदली सुविधा और अगस्त महीने में एफडीआई, ईसीबी तथा प्रेषण के मजबूत प्रवाह से विदेशी मुद्रा भंडार को समर्थन मिला है। संचार, विविध सेवाओं और विनिर्माण क्षेत्रों में अधिकांश एफडीआई आया है।
वैश्विक तनाव और वित्तीय स्थितियों के सख्त होने के कारण सितंबर और अक्टूबर में शेयर बाजारों में मुख्य रूप से गिरावट का रुख रहा और विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक शुद्ध खरीदार रहे।
आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि बुलेटिन में प्रकाशित लेख के विचार लेखकों के हैं और इन्हें केंद्रीय बैंक का आधिकारिक रुख नहीं माना जाना चाहिए।
खबर का संदर्भ
आरबीआई के बुलेटिन में वैश्विक चुनौतियों और घरेलू आर्थिक संकेतकों का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है, जिसमें यह बताया गया है कि वैश्विक दबावों के बावजूद घरेलू मांग और विदेशी मुद्रा प्रवाह ने अर्थव्यवस्था को कैसे संभाला है।
EXPLAINED
आपके सवाल, सीधे जवाब
01. भारतीय अर्थव्यवस्था को किस मुख्य कारक से समर्थन मिल रहा है?
घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की मजबूती से भारतीय अर्थव्यवस्था को समर्थन मिल रहा है।
02. आरबीआई बुलेटिन के अनुसार शेयर बाजारों में किस तरह का रुख रहा?
सितंबर और अक्टूबर में भारतीय शेयर बाजारों में ज्यादातर गिरावट का रुख रहा।
