एक नज़र में
- ग्रीनलैंड, डेनमार्क और अमेरिका के बीच सुरक्षा समझौते को मंजूरी मिली।
- इससे ग्रीनलैंड में और अधिक अमेरिकी सैन्य ठिकाने स्थापित किए जा सकेंगे।
- द्वीप पर नियंत्रण डेनमार्क का ही रहेगा और भविष्य में स्वतंत्रता के बाद भी समझौता लागू रहेगा।
ग्रीनलैंड के सांसदों ने अमेरिका और डेनमार्क के साथ एक सुरक्षा समझौते को मंजूरी दे दी है। इस त्रिपक्षीय समझौते का उद्देश्य आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है।
यह समझौता ग्रीनलैंड में अधिक अमेरिकी सैन्य ठिकाने स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर नियंत्रण हासिल करने के दबाव के बाद यह कदम उठाया गया है, जिससे तनाव कम होने की उम्मीद है।
समझौते के तहत ग्रीनलैंड पर नियंत्रण डेनमार्क का ही बना रहेगा। इसके अलावा, यदि ग्रीनलैंड भविष्य में कभी स्वतंत्रता चुनता है, तब भी यह सुरक्षा समझौता लागू रहेगा।
खबर का संदर्भ
यह समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड पर नियंत्रण संबंधी दबाव के बाद सामने आया है। इस त्रिपक्षीय व्यवस्था से आर्कटिक क्षेत्र में सैन्य उपस्थिति बढ़ने के साथ-साथ कूटनीतिक तनाव कम होने की संभावना है।
EXPLAINED
आपके सवाल, सीधे जवाब
01. इस समझौते का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस त्रिपक्षीय समझौते का मुख्य उद्देश्य ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को बढ़ाकर आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्रों में सुरक्षा को मजबूत करना है।
02. क्या समझौते के बाद ग्रीनलैंड पर नियंत्रण बदल जाएगा?
नहीं, इस स्वशासी द्वीप पर नियंत्रण डेनमार्क का ही रहेगा।
