एक नज़र में
- आरबीआई ने सरकारी तेल कंपनियों के लिए स्पेशल डॉलर विंडो शुरू की।
- फॉरेक्स डेरिवेटिव ट्रेडिंग के नियमों में सख्ती की गई।
- बाजार से नकदी घटाने के लिए बॉन्ड्स बेचने और सीआरआर नियमों में बदलाव किए गए।
डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रहे भारतीय रुपए को संभालने और बाजार के उतार-चढ़ाव पर लगाम कसने के उद्देश्य से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अहम कदम उठाए हैं। इसके तहत सरकारी तेल कंपनियों की दैनिक डॉलर जरूरतों को पूरा करने के लिए एक विशेष डॉलर विंडो खोली गई है।
इसके अलावा, आरबीआई ने फॉरेक्स डेरिवेटिव ट्रेडिंग से जुड़े नियमों को भी सख्त कर दिया है ताकि बाजार में सट्टेबाजी पर रोक लगाई जा सके। विश्लेषकों का मानना है कि इन उपायों से रुपए को कुछ राहत मिल सकती है, हालांकि वैश्विक दबाव के कारण मध्यम अवधि में चुनौतियां बनी रह सकती हैं।
रुपए पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, मजबूत डॉलर और विदेशी निवेश के सुस्त होने का दबाव लगातार बना हुआ है। आरबीआई रुपए को 97 प्रति डॉलर के स्तर से ऊपर जाने से रोकने का प्रयास कर रहा है।
तरलता नियंत्रित करने के लिए आरबीआई ने ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) के जरिए सरकारी बॉन्ड्स बेचने और बैंकों के लिए कैश रिजर्व रेशियो (CRR) के दैनिक रखरखाव के नियमों को भी कड़ा किया है।
खबर का संदर्भ
भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार में अस्थिरता को कम करने और रुपए के मूल्य को थामने के लिए कई मौद्रिक उपाय किए हैं। तेल कंपनियों के लिए अलग से डॉलर की व्यवस्था करने से स्पॉट मार्केट पर दबाव कम होगा, जबकि डेरिवेटिव नियमों और OMO के जरिए सट्टेबाजी और अतिरिक्त नकदी पर शिकंजा कसा गया है।
EXPLAINED
आपके सवाल, सीधे जवाब
01. स्पेशल डॉलर विंडो से क्या लाभ होगा?
इससे सरकारी तेल कंपनियों की दैनिक डॉलर की जरूरतें सीधे आरबीआई के फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व से पूरी होंगी, जिससे स्पॉट फॉरेक्स मार्केट में डॉलर की सीधी मांग का दबाव घटेगा।
02. आरबीआई ओएमओ (OMO) के जरिए क्या करेगा?
आरबीआई ओपन मार्केट ऑपरेशन के जरिए सरकारी बॉन्ड्स बेचकर बाजार से अतिरिक्त नकदी (लिक्विडिटी) कम करेगा।
