एक नज़र में
- राष्ट्रमंडल खेल 2002 की स्वर्ण विजेता महिला हॉकी टीम के कोच थे गुरदयाल सिंह भंगू।
- कनाडा के सरे में 86 वर्ष की आयु में हुआ निधन।
- भारतीय हॉकी में योगदान के लिए 2000 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किए गए थे।
राष्ट्रमंडल खेल 2002 में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम के कोच रहे गुरदयाल सिंह भंगू का कनाडा के सरे में निधन हो गया है। निधन के समय उनकी आयु 86 वर्ष थी। हॉकी इंडिया ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
उनके मार्गदर्शन में भारतीय महिला हॉकी टीम ने मैनचेस्टर में खेले गए राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल में इंग्लैंड को 3-2 से हराया था। इस रोमांचक मुकाबले में ममता खरब ने अतिरिक्त समय में विजयी गोल किया था। यह जीत बाद में बॉलीवुड फिल्म 'चक दे इंडिया' की कहानी का आधार बनी थी।
गुरदयाल सिंह भंगू का जन्म लायलपुर में हुआ था और वह अंबाला में पले-बढ़े थे। उन्होंने पटियाला के राष्ट्रीय खेल संस्थान से कोचिंग का प्रशिक्षण प्राप्त किया था। भारतीय टीम के कोच बनने से पहले उन्होंने नाइजीरिया की महिला हॉकी टीम को भी कोचिंग दी थी। भारतीय हॉकी में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2000 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
खबर का संदर्भ
गुरदयाल सिंह भंगू का भारतीय हॉकी में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके मार्गदर्शन में 2002 के राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय महिला टीम ने ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता था, जो आगे चलकर लोकप्रिय संस्कृति और फिल्म का भी आधार बना।
EXPLAINED
आपके सवाल, सीधे जवाब
01. गुरदयाल सिंह भंगू का निधन कहां हुआ?
उनका निधन कनाडा के सरे में हुआ।
02. उन्हें द्रोणाचार्य पुरस्कार कब मिला था?
उन्हें वर्ष 2000 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
