एक नज़र में
- दीपावली पर महालक्ष्मी के आठ स्वरूपों की पूजा की जाती है।
- अष्टलक्ष्मी का उल्लेख ऋग्वेद के श्रीसूक्त, महाभारत और नारद पंचरात्र में है।
दीपावली के दिन महालक्ष्मी की विशेष पूजा का विधान है। सनातन परंपरा में लक्ष्मी को केवल धन की देवी नहीं माना जाता, बल्कि जीवन की आठ आवश्यक इच्छाओं और पहलुओं के लिए भी उनकी आराधना की जाती है।
देवी के इन आठ स्वरूपों का उल्लेख ऋग्वेद के श्रीसूक्त, महाभारत और नारद पंचरात्र जैसे ग्रंथों में मिलता है। इसके अतिरिक्त, अष्टलक्ष्मी से जुड़ी अनेक लोककथाएं भी समाज में प्रचलित हैं और देश के विभिन्न हिस्सों में इनके मंदिर भी स्थित हैं।
भक्तजन अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं और आवश्यकताओं के अनुसार महालक्ष्मी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं।
खबर का संदर्भ
यह लेख दीपावली के अवसर पर महालक्ष्मी के अष्टस्वरूपों की पूजा की परंपरा और प्राचीन ग्रंथों में उनके उल्लेख की जानकारी देता है।
EXPLAINED
आपके सवाल, सीधे जवाब
01. महालक्ष्मी के आठ स्वरूपों का उल्लेख किन ग्रंथों में मिलता है?
इनका उल्लेख ऋग्वेद के श्रीसूक्त, महाभारत और नारद पंचरात्र में मिलता है।