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फ्रांस में शमोंडा वायरस का पहला इंसानी मामला आया सामने

लेखक: admin · प्रकाशित:
स्वास्थ्य

साधना न्यूज़ डेस्क2 मिनट में पढ़ें

एक नज़र में

  • फ्रांस में शमोंडा वायरस का पहला इंसानी मामला सामने आया
  • संक्रमित व्यक्ति की इलाज के दौरान हुई मौत
  • यह वायरस पहले केवल पशुओं में पाया जाता था

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने फ्रांस में शमोंडा वायरस के पहले इंसानी संक्रमण की पुष्टि की है। फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, संक्रमित व्यक्ति की उम्र 60 वर्ष से अधिक थी और उनका इम्यून सिस्टम कमजोर था, जिनकी इलाज के दौरान मौत हो गई।

यह वायरस मुख्य रूप से मवेशियों, भेड़ों, बकरियों और घोड़ों जैसे जानवरों को प्रभावित करता है। शमोंडा वायरस सबसे पहले 1960 के दशक में नाइजीरिया के मवेशियों में पाया गया था और यह श्मालेनबर्ग वायरस परिवार से संबंधित है।

इंसानों में संक्रमण का यह पहला मामला होने के कारण इसके लक्षणों की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। माना जा रहा है कि यह वायरस मिज जैसी मक्खियों के काटने से इंसानों में फैल सकता है, जो संक्रमित पशुओं के संपर्क में आती हैं।

हालांकि, इस बात का कोई प्रमाण नहीं मिला है कि यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है या संक्रमित पशुओं को छूने से फैलता है। इस वायरस के संक्रमण के कारणों और खतरों को लेकर अभी शोध जारी है।

खबर का संदर्भ

शमोंडा वायरस का इंसानों में संक्रमण का यह पहला मामला फ्रांस में दर्ज किया गया है, जिसकी पुष्टि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने की है। यह वायरस पहले मुख्य रूप से पशुओं में पाया जाता था और इसके संक्रमण के कारणों की जांच अभी जारी है।

EXPLAINED

आपके सवाल, सीधे जवाब

01. शमोंडा वायरस का पहला इंसानी मामला कहां मिला है?

फ्रांस में शमोंडा वायरस का पहला इंसानी मामला मिला है।

02. शमोंडा वायरस सबसे पहले कहां पाया गया था?

यह वायरस सबसे पहले 1960 के दशक में नाइजीरिया के मवेशियों में पाया गया था।

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