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10 अक्टूबर को शनिश्चरी अमावस्या और सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या का संयोग

लेखक: admin · प्रकाशित:
धर्म

साधना न्यूज़ डेस्क2 मिनट में पढ़ें

एक नज़र में

  • 10 अक्टूबर को है शनिश्चरी और सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या
  • शनि अनुकूलता और पितृ तृप्ति के लिए दान-पुण्य का है विधान
  • कौए, गाय और कुत्तों को भोजन कराने की है परंपरा

आश्विन मास की सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या इस बार शनिवार, 10 अक्टूबर को पड़ रही है, जिससे यह शनिश्चरी अमावस्या का योग बना रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए धर्म-कर्म और दान-पुण्य का अक्षय फल मिलता है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इस तिथि पर पितरों की तृप्ति के लिए कर्म करने के साथ ही शनि ग्रह की अनुकूलता के लिए भी उपाय किए जा सकते हैं। इस दिन विधि-विधान से श्राद्ध के अलावा सेवा और दान का भी विशेष महत्व बताया गया है।

इस अवसर पर जरूरतमंदों की सहायता, रोगियों को दवा दान, और छोटे बच्चों को भोजन कराने जैसे कार्य किए जा सकते हैं। इसके अलावा गाय, कुत्ते और कौए को भोजन कराने की परंपरा भी है, जिसमें कौए को पितरों का प्रतीक माना जाता है।

पूजा और धूप-ध्यान के लिए गाय के गोबर के कंडे, घी, काले तिल, चावल, गुड़, कपूर और जल से भरा तांबे का लोटा जैसी सामग्री का उपयोग किया जा सकता है। सामग्री के अभाव में श्रद्धापूर्वक जल, तिल, कंडे के अंगारे और गुड़-घी से भी पितरों का स्मरण किया जा सकता है।

खबर का संदर्भ

यह रिपोर्ट धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है, जिसमें शनिश्चरी अमावस्या और सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या के संयोग पर किए जाने वाले धार्मिक कार्यों और दान-पुण्य का वर्णन किया गया है।

EXPLAINED

आपके सवाल, सीधे जवाब

01. शनिश्चरी अमावस्या कब है?

शनिवार, 10 अक्टूबर को शनिश्चरी अमावस्या है।

02. इस दिन किनकी तृप्ति के लिए कर्म किए जाते हैं?

इस दिन पितरों की तृप्ति और शनि ग्रह की अनुकूलता के लिए कर्म किए जाते हैं।

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