हमारे बारे मेंसंपर्कRSS
साधना न्यूज़SADHNA NEWS · हिंदी समाचार

राष्ट्रीय · स्थानीय · जनसरोकार

ब्रेकिंग न्यूज़
फिलहाल कोई नया ब्रेकिंग अपडेट नहीं है। प्रमुख समाचार देखें →

पितृ पक्ष की मातृ नवमी पर दिवंगत सुहागिन महिलाओं के लिए करें श्राद्ध और धूप-ध्यान

लेखक: admin · प्रकाशित:
धर्म

साधना न्यूज़ डेस्क2 मिनट में पढ़ें

एक नज़र में

  • मातृ नवमी पर दिवंगत सुहागिन महिलाओं और नवमी तिथि को मृत्यु प्राप्त पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है।
  • श्राद्ध कर्म के लिए दोपहर का कुतुप काल श्रेष्ठ माना जाता है।
  • इस दिन जरूरतमंद महिला को सुहाग की सामग्री दान करना शुभ माना जाता है।

पितृ पक्ष की नवमी तिथि को मातृ नवमी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन घर-परिवार की उन दिवंगत महिलाओं के लिए श्राद्ध और तर्पण करने का विशेष अवसर माना जाता है, जिनकी मृत्यु सुहागिन अवस्था में हुई थी। इसके अलावा, जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि भी नवमी हो, उनका श्राद्ध कर्म भी इसी दिन किया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में श्राद्ध, पिंडदान, तर्पण और दान-पुण्य करने से पितरों को तृप्ति मिलती है। मातृ नवमी पर उन मृत सुहागिन महिलाओं के लिए भी श्राद्ध किया जा सकता है जिनकी मृत्यु की सटीक तिथि परिवार को ज्ञात न हो।

श्राद्ध कर्म के लिए दोपहर का समय श्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन घर के मंदिर में इष्टदेव की पूजा के बाद पितरों के लिए सात्विक भोजन तैयार किया जाता है, जिसमें लहसुन और प्याज का उपयोग नहीं होता है। धार्मिक कार्यों में तांबे के बर्तनों का प्रयोग शुभ बताया गया है।

श्राद्ध के पश्चात गाय, कौए और कुत्ते के लिए भोजन निकालने की परंपरा है। मातृ नवमी के अवसर पर किसी जरूरतमंद महिला को सुहाग की सामग्री जैसे चूड़ियां, साड़ी, कुमकुम और बिंदिया दान करना भी शुभ माना जाता है।

खबर का संदर्भ

यह रिपोर्ट पितृ पक्ष के दौरान आने वाली मातृ नवमी के धार्मिक और पारंपरिक पहलुओं पर आधारित है, जिसमें श्राद्ध कर्म, तर्पण और दान-पुण्य से जुड़ी विधियों का वर्णन किया गया है।

EXPLAINED

आपके सवाल, सीधे जवाब

01. मातृ नवमी किसे कहते हैं?

पितृ पक्ष की नवमी तिथि को मातृ नवमी कहा जाता है, जो दिवंगत सुहागिन महिलाओं के श्राद्ध के लिए विशेष मानी जाती है।

02. श्राद्ध कर्म के लिए कौन सा समय श्रेष्ठ है?

श्राद्ध कर्म के लिए दोपहर का समय यानी कुतुप काल श्रेष्ठ माना जाता है।

धर्म की और खबरें पढ़ें →

यह भी पढ़ें

@sadhnanewsbplFacebookInstagramYouTubeX
Design by Bharti Infotech · 9993475129