एक नज़र में
- नई राष्ट्रीय इस्पात नीति का ड्राफ्ट अगले एक सप्ताह में सार्वजनिक होने की उम्मीद है।
- 2047 तक भारत की इस्पात उत्पादन क्षमता 600 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंचने का अनुमान है।
- कच्चे इस्पात के प्रति टन कार्बन उत्सर्जन को 2.54 टन से घटाकर 1.54 टन करने का लक्ष्य है।
भारत सरकार नई राष्ट्रीय इस्पात नीति को जल्द ही आम लोगों और उद्योग से जुड़े पक्षों की राय के लिए सार्वजनिक करने की तैयारी में है। इस्पात सचिव संदीप पौंडरिक के अनुसार, इस नीति का ड्राफ्ट अगले करीब एक सप्ताह में सार्वजनिक किए जाने की उम्मीद है जिसके बाद उद्योग और अन्य पक्ष अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे।
सरकार का अनुमान है कि 2047 तक भारत की इस्पात उत्पादन क्षमता बढ़कर 600 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच सकती है। इस नई नीति का मकसद उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ उद्योग को तकनीक और कीमत के मामले में मजबूत बनाना और सस्ते विदेशी इस्पात के आयात को रोकना है।
नीति के तहत 2035 और 2047 के लिए हरित इस्पात, विशेष इस्पात और जंगरोधी इस्पात के उत्पादन के लक्ष्य तय किए जा रहे हैं। साथ ही, 2047 तक कच्चे इस्पात के प्रति टन उत्पादन पर कार्बन उत्सर्जन को 2.54 टन से घटाकर करीब 1.54 टन करने का लक्ष्य है, जो 2070 तक शून्य शुद्ध उत्सर्जन के लक्ष्य से जुड़ा है।
खबर का संदर्भ
यह रिपोर्ट भारत सरकार की नई राष्ट्रीय इस्पात नीति के प्रस्तावों पर आधारित है, जिसका उद्देश्य 2047 तक देश के इस्पात क्षेत्र को आत्मनिर्भर और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। इसमें उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन घटाने और कच्चे माल की सुरक्षा पर ध्यान दिया गया है।
EXPLAINED
आपके सवाल, सीधे जवाब
01. नई राष्ट्रीय इस्पात नीति का ड्राफ्ट कब तक सार्वजनिक होने की उम्मीद है?
इस नीति का ड्राफ्ट अगले करीब एक सप्ताह में सार्वजनिक किए जाने की उम्मीद है।
02. 2047 तक इस्पात उत्पादन क्षमता कितना पहुंचने का अनुमान है?
सरकार का अनुमान है कि 2047 तक भारत की इस्पात उत्पादन क्षमता 600 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच सकती है।