एक नज़र में
- पैकेट पर लिखना अनिवार्य है कि मां का दूध सबसे अच्छा आहार है।
- बेबी फूड और फॉर्मूला मिल्क के विज्ञापनों तथा प्रमोशन पर रोक लगाई गई।
- नियमों का उल्लंघन करने पर दस लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।
महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने शिशुओं के फॉर्मूला मिल्क और बेबी फूड के संबंध में नए और सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन नियमों के तहत अब पैकेट पर यह लिखना अनिवार्य कर दिया गया है कि बच्चे के लिए मां का दूध सबसे अच्छा आहार है। इसके साथ ही उत्पादों के विज्ञापनों, मुफ्त नमूनों, उपहारों और सोशल मीडिया प्रमोशन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। यह निर्देश निर्माताओं से लेकर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स तक पर लागू होंगे।
नए नियमों के अनुसार पैकेट पर बच्चे या मां की किसी भी प्रकार की तस्वीर का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा बेबी फूड में प्रिजर्वेटिव, अतिरिक्त रंग और फ्लेवरिंग एजेंटों को प्रतिबंधित कर दिया गया है। सुक्रोज का सीमित इस्तेमाल ही अनुमत है और भ्रामक रूप से 'नो एडेड शुगर' का दावा करने पर भी रोक रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने पर दस लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
निर्माताओं और आयातकों को अपने उत्पादों के हर बैच की ट्रेसेबिलिटी बनाए रखनी होगी और गंभीर घटनाओं की रिपोर्ट 48 घंटे के भीतर देनी होगी। अस्पतालों और बाल रोग विशेषज्ञों को भी बच्चों में प्रतिकूल प्रभावों की जानकारी देनी होगी। भारत में फॉर्मूला मिल्क का बाजार लगभग सत्ताईस हजार करोड़ रुपए का है।
खबर का संदर्भ
महाराष्ट्र एफडीए द्वारा उठाए गए इन कदमों का उद्देश्य शिशु आहार के विपणन को विनियमित करना और बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा करना है। फॉर्मूला मिल्क और बेबी फूड के विज्ञापनों पर रोक तथा पैकेट पर चेतावनियां अनिवार्य करने से उपभोक्ताओं को पारदर्शी जानकारी मिल सकेगी।
EXPLAINED
आपके सवाल, सीधे जवाब
01. फॉर्मूला मिल्क क्या होता है?
यह शिशुओं के लिए बनाया गया दूध का विकल्प है जिसे आमतौर पर पाउडर के रूप में पानी में मिलाकर दिया जाता है।
02. भारत में फॉर्मूला मिल्क का बाजार कितना बड़ा है?
भारत में फॉर्मूला मिल्क का सालाना बाजार लगभग सत्ताईस हजार करोड़ रुपए का है।
