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रंगे हाथों पकड़ा गया रेत माफिया! देखिए कैसे माँ नर्मदा का खून चूसा जा रहा है! 🚨

सीहोर में नर्मदा की जलधारा में रेत खनन के आरोप, भारी मशीनरी के इस्तेमाल पर उठे सवाल

लेखक: admin · प्रकाशित:

घाटों पर पोकलेन और नदी के बीच सक्शन मशीनों के इस्तेमाल के दावों से पर्यावरणीय नियमों के पालन पर सवाल; प्रशासन और खनिज विभाग की कार्रवाई पर भी नजर

Sehore Illegal Sand Mining: NGT Ban Violated in Narmada River

सीहोर/भोपाल।

सीहोर जिले में नर्मदा नदी के तटीय क्षेत्रों में रेत खनन को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरों और वीडियो में नदी के घाटों के साथ-साथ जलधारा के भीतर भी भारी मशीनरी और सक्शन सिस्टम के इस्तेमाल के दावे किए जा रहे हैं। यदि ये दावे सही पाए जाते हैं, तो यह पर्यावरणीय नियमों और नदी संरक्षण से जुड़े प्रावधानों के पालन को लेकर गंभीर मामला हो सकता है।

ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आए मशीनरी के इस्तेमाल के दावे

उपलब्ध तस्वीरों में नर्मदा के तटीय क्षेत्र में भारी मशीनों के जरिए रेत निकालने की गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। वहीं कुछ स्थानों पर नदी की जलधारा के भीतर सक्शन पंप और क्रेन जैसे उपकरणों के इस्तेमाल की बात सामने आई है।

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार नदी की मुख्य जलधारा में बड़े पैमाने पर मशीनरी का इस्तेमाल नदी के प्राकृतिक प्रवाह, जलीय पारिस्थितिकी तंत्र और नदी के तल पर प्रभाव डाल सकता है। हालांकि, इन गतिविधियों की वैधानिक स्थिति और अनुमति से जुड़े तथ्यों की पुष्टि संबंधित विभागों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

कार्रवाई के दावों के बावजूद उठ रहे सवाल

सीहोर जिला प्रशासन और खनिज विभाग की ओर से समय-समय पर अवैध रेत परिवहन और खनन के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आती रही है। इसके बावजूद यदि नदी के बीच भारी मशीनरी से खनन की गतिविधियां जारी हैं, तो निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अब प्रमुख सवाल यह है कि नदी की जलधारा में मशीनरी के इस्तेमाल की अनुमति किसके पास है? क्या संबंधित ठेकेदार या संचालकों के पास वैध अनुमति और पर्यावरणीय स्वीकृतियां मौजूद हैं? यदि गतिविधियां अवैध हैं, तो इनके खिलाफ अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

प्रशासन से इन बिंदुओं पर मांगा जा सकता है जवाब

• नदी की जलधारा में इस्तेमाल हो रही भारी मशीनरी की अनुमति और वैधता क्या है?

• संबंधित क्षेत्रों में रेत खनन के लिए स्वीकृत पर्यावरणीय एवं खनन शर्तों का पालन हो रहा है या नहीं?

• यदि नियमों का उल्लंघन मिला है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों और मशीनरी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई?

• नदी के पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले प्रभाव का कोई वैज्ञानिक आकलन कराया गया है या नहीं?

नर्मदा संरक्षण को लेकर गंभीर चिंता

नर्मदा मध्यप्रदेश की प्रमुख नदियों में से एक है और इसके संरक्षण को लेकर लगातार अभियान चलाए जाते रहे हैं। ऐसे में नदी की जलधारा में बड़े पैमाने पर मशीनरी के इस्तेमाल के आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

इस मामले में जिला प्रशासन, खनिज विभाग और पर्यावरण से जुड़े अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी। फिलहाल सामने आए दावों और तस्वीरों ने नर्मदा में रेत खनन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

विशेष रिपोर्ट।

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