बिहार की ग्रामीण महिलाएं: हुनर से आत्मनिर्भरता की नई उड़ान, बन रहीं सफल उद्यमी Bihar Rural Women Entrepreneurs
Movie news: Star spotlight: बिहार के ग्रामीण अंचलों से अब एक नई कहानी उभर रही है, जहाँ की महिलाएं केवल घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं, बल्कि अपनी प्रतिभा से आर्थिक आत्मनिर्भरता का नया अध्याय लिख रही हैं। यह उनके सशक्तिकरण की एक ऐसी गाथा है, जो न सिर्फ उनके जीवन में बदलाव ला रही है, बल्कि पूरे समाज और राज्य की आर्थिक दशा को भी मजबूत कर रही है। जिन हाथों में कभी सिर्फ चूल्हा-चौका संभालने की जिम्मेदारी थी, आज वही हाथ खादी उत्पादों के निर्माण और मार्केटिंग में अपनी पहचान बना रहे हैं, बाज़ार में एक नई लहर पैदा कर रहे हैं।
राज्य सरकार द्वारा संचालित खादी प्रशिक्षण केंद्र इन महिलाओं को सिर्फ कौशल ही नहीं दे रहे, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान की राह भी दिखा रहे हैं। इन केंद्रों में महिलाएं अपने छिपे हुए हुनर को पहचान कर उसे व्यावसायिक रूप दे रही हैं।
पारंपरिक कार्यों को दिया आधुनिक स्वरूप
पहले जिन कार्यों को केवल घरेलू ज़रूरतों तक सीमित माना जाता था, जैसे कि वस्त्र सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, अगरबत्ती बनाना या साबुन और डिटर्जेंट पाउडर का निर्माण, अब वही काम इन महिलाओं को आर्थिक रूप से सबल बना रहे हैं। खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग की देखरेख में चल रहे ये प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं को नवीनतम तकनीकों और व्यावहारिक जानकारी से लैस कर रहे हैं। वे अब सिर्फ उत्पाद बनाना नहीं सीख रहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता, फैब्रिक के आधुनिक डिज़ाइन ट्रेंड्स और बाज़ार की बदलती मांगों को भी बारीकी से समझ रही हैं, ताकि उनके उत्पाद बाज़ार में सफलतापूर्वक प्रतिस्पर्धा कर सकें।
प्रशिक्षण की अनुकूल अवधि
महिलाओं की सुविधा और विभिन्न कौशलों की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों की अवधि भी सोच-समझकर निर्धारित की गई है:
* वस्त्र सिलाई और बुनाई जैसे गहन कौशलों के लिए तीन महीने का प्रशिक्षण।
* अगरबत्ती और डिटर्जेंट निर्माण जैसे कार्यों के लिए एक महीने का त्वरित प्रशिक्षण।
यह सुनियोजित तरीका महिलाओं को शीघ्र कौशल हासिल करने और जल्द से जल्द अपना उद्यम शुरू करने में मदद करता है।
सफलता की ओर बढ़ते कदम
वित्तीय वर्ष 2024-25 में, राज्य भर में कुल 59 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनसे 950 महिलाओं और 550 पुरुषों सहित कुल 1500 व्यक्तियों को लाभ मिला। प्रशिक्षण पूर्ण करने के उपरांत, अनेक महिलाएं खादी संस्थाओं से जुड़कर स्थायी आय अर्जित कर रही हैं, वहीं कई अन्य ने अपने छोटे व्यवसाय स्थापित कर आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त किया है।
यह परिवर्तन न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त कर रहा है, बल्कि उनके आत्म-सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा में भी उल्लेखनीय वृद्धि ला रहा है। आज गांवों की ये महिलाएं न केवल अपने परिवार का संबल बन रही हैं, बल्कि अपने कौशल और उद्यमशीलता से समाज और राज्य की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
उद्योग मंत्री का दूरदर्शी विजन
इस महत्वपूर्ण अभियान के पीछे राज्य के उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा की दूरदर्शिता और दृढ़ संकल्प की अहम भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि “हमारा लक्ष्य है कि प्रत्येक प्रमंडल में खादी मॉल स्थापित किए जाएं, जिससे ग्रामीण उत्पादों को एक व्यापक बाज़ार मिल सके और इन हुनरमंद कारीगरों को उनके उत्पादों का सही मूल्य प्राप्त हो।”
यह पहल ग्रामीण बिहार में एक नई क्रांति का सूत्रपात कर रही है, जहाँ महिलाएं अपनी मेहनत और लगन से अपनी किस्मत खुद गढ़ रही हैं। Follow साधनान्यूज़.com for the latest updates.
- बिहार की ग्रामीण महिलाएं अब घर-गृहस्थी से आगे बढ़कर उद्यमशीलता की राह पर अग्रसर हैं।
- राज्य सरकार के खादी प्रशिक्षण केंद्र उन्हें विभिन्न उत्पादों के निर्माण का कौशल सिखा रहे हैं।
- सिलाई, बुनाई, अगरबत्ती और साबुन जैसे पारंपरिक कार्यों को व्यावसायिक रूप दिया जा रहा है।
- प्रशिक्षण में उत्पाद की गुणवत्ता, डिज़ाइन और बाज़ार की मांग को समझने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
- कौशल के प्रकार के अनुसार प्रशिक्षण की अवधि अलग-अलग है (जैसे सिलाई के लिए 3 माह, अगरबत्ती के लिए 1 माह)।
- वित्तीय वर्ष 2024-25 में 950 महिलाओं सहित कुल 1500 लोगों को प्रशिक्षण से लाभ मिला है।
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स्रोत: MediaVarta
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