विश्व में घट रहा शराब का चलन: स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता का प्रभाव Politics Of Alcohol Decline
Policy buzz: Political update: दुनिया भर में सामाजिक व्यवहार और जीवनशैली में आ रहे बड़े बदलावों के बीच, शराब के सेवन की आदतों में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल रहा है। यह सिर्फ एक व्यक्तिगत पसंद का मामला नहीं है, बल्कि इसके गहरे सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी हैं जिन पर नीति निर्माताओं की भी नज़र है। एक चौंकाने वाला सकारात्मक तथ्य सामने आया है: वैश्विक स्तर पर शराब का सेवन लगातार कम हो रहा है, जो आधुनिक समाज की बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाता है।
पहले यह एक आम धारणा थी कि अगर शराब पर कड़े प्रतिबंध, नियंत्रण और भारी कर न लगाए जाएं, तो लोग इसका अत्यधिक सेवन करेंगे, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक व्यवस्था बिगड़ सकती है। लेकिन हाल के वैश्विक रुझान इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह धारणा बदल रही है। दुनिया के कई हिस्सों में, लोग अब स्वेच्छा से शराब से दूरी बना रहे हैं या उसका सेवन कम कर रहे हैं, भले ही सख्त नियम लागू हों या न हों। संयुक्त राज्य अमेरिका में गैलप द्वारा किए गए नवीनतम सर्वेक्षण के अनुसार, 2025 में केवल 54% अमेरिकी ही किसी न किसी रूप में शराब का सेवन कर रहे थे। यह आंकड़ा पिछले 90 वर्षों में मापा गया सबसे निचला स्तर है, जो एक महत्वपूर्ण सामाजिक बदलाव की ओर इशारा करता है।
विशेष रूप से, शराब की कुछ श्रेणियां इस गिरावट से कहीं अधिक प्रभावित हुई हैं। उदाहरण के लिए, वाइन की खपत में लगभग 20% या उससे अधिक की उल्लेखनीय कमी देखी गई है, जो इस क्षेत्र के लिए एक चुनौती है। यहां तक कि बीयर के शौकीनों के गढ़ माने जाने वाले यूरोप में भी बाजार अनुसंधान से यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि 71% उपभोक्ता अब या तो कम मात्रा में शराब पी रहे हैं या उन्होंने पूरी तरह से शराब का त्याग कर दिया है। यह प्रवृत्ति युवाओं और मध्यम आयु वर्ग के लोगों दोनों में देखी जा रही है, जो एक व्यापक सांस्कृतिक बदलाव का संकेत है।
इस वैश्विक प्रवृत्ति में भारत थोड़ा अपवाद लग सकता है, जहां शराब की बिक्री में लगभग 7% वार्षिक दर से वृद्धि देखी जा रही है, जो एक मजबूत आर्थिक वृद्धि और बढ़ती डिस्पोजेबल आय को भी दर्शाती है। हालांकि, यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि अमेरिका और यूरोप जैसे विकसित देशों में जहां प्रति व्यक्ति वार्षिक शराब की खपत लगभग 8-9 लीटर है, वहीं भारत में यह अभी भी लगभग 3 लीटर प्रतिवर्ष ही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में भारत में भी शराब की बिक्री एक निश्चित स्तर पर पहुँच कर स्थिर हो सकती है और फिर पश्चिमी देशों की तरह ही गिरावट का रुख देखने को मिल सकता है। भारत के कुछ शहरी क्षेत्रों और महानगरों में, विशेषकर जेन-जी (Gen-Z) उपभोक्ताओं के बीच, बीयर और पारंपरिक शराब की खपत या तो स्थिर हो रही है या उसमें कमी आ रही है, जो आने वाले समय में बड़े बदलावों का प्रारंभिक संकेत है।
लेकिन यह सवाल उठता है कि आखिर दुनिया पहले की तुलना में कम शराब क्यों पी रही है? इसके पीछे कुछ प्रमुख और गहरे सामाजिक-मनोवैज्ञानिक कारण हैं:
* **बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता और वेलनेस संस्कृति:** आज के लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति पहले से कहीं अधिक सचेत और जागरूक हैं। ‘वेलनेस’ या समग्र कल्याण का विचार अब केवल एक फैशन नहीं, बल्कि एक जीवनशैली बन गया है। लोग अब ‘हैंगओवर’ के शारीरिक और मानसिक प्रभावों से बचने के बजाय, एक स्वस्थ और ऊर्जावान जीवन को प्राथमिकता दे रहे हैं। कम सिगरेट पीना, नियमित रूप से योग और व्यायाम करना, पौष्टिक भोजन और ग्रीन जूस का सेवन करना तथा शराब से दूरी बनाए रखना अब स्वस्थ जीवनशैली का अभिन्न अंग बन गए हैं। प्रमुख स्वास्थ्य मंचों और डिजिटल इन्फ्लुएंसर्स द्वारा प्रकाशित अनगिनत लेख और वीडियो भी इस बात को रेखांकित करते हैं कि कैसे शारीरिक और मानसिक कल्याण अब सर्वोपरि है, और शराब का सेवन इसमें बाधा बन सकता है।
* **सामाजिक निगरानी का बढ़ता दायरा और डिजिटल पदचिह्न:** इक्कीसवीं सदी में, लगभग हर व्यक्ति की जेब में एक उच्च-गुणवत्ता वाला वीडियो कैमरा मौजूद है – उनका स्मार्टफोन। यह उपकरण किसी भी समय आपके सार्वजनिक व्यवहार को रिकॉर्ड कर सकता है और उसे तुरंत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा कर सकता है। पिछली रात पब या किसी पार्टी में की गई कोई भी अनुचित हरकत, जैसे लड़ाई-झगड़ा, सार्वजनिक रूप से बेहोश होना, बेसुरे गाने गाना, या अप्रिय दृश्य बनाना, अगले दिन आपको सार्वजनिक शर्मिंदगी का कारण बना सकती है। ऐसे वीडियो के वायरल होने से न केवल व्यक्तिगत और पारिवारिक प्रतिष्ठा पर आंच आती है, बल्कि नौकरी जाने, गंभीर कानूनी परिणामों का सामना करने या यहां तक कि सामाजिक बहिष्कार का भी जोखिम होता है। यह ‘डिजिटल फुटप्रिंट’ के डर ने लोगों को सार्वजनिक रूप से अधिक जिम्मेदार और संयमित व्यवहार करने के लिए प्रेरित किया है। युवा पीढ़ी, जो डिजिटल दुनिया में पली-बढ़ी है, इस जोखिम को सबसे बेहतर तरीके से समझती है।
ये बदलाव दर्शाते हैं कि आधुनिक समाज एक नई दिशा में बढ़ रहा है, जहाँ व्यक्तिगत स्वास्थ्य, सामाजिक जिम्मेदारी और डिजिटल युग की पारदर्शिता को अत्यधिक महत्व दिया जा रहा है। यह प्रवृत्ति आने वाले दशकों में हमारे सामाजिक ताने-बाने को और भी गहराई से प्रभावित कर सकती है। Stay updated with साधनान्यूज़.com for more news.
- वैश्विक स्तर पर शराब का सेवन लगातार घट रहा है, अमेरिका में 90 वर्षों के न्यूनतम स्तर पर।
- यूरोप में 71% उपभोक्ता शराब कम कर रहे हैं या पूरी तरह छोड़ रहे हैं, वाइन की खपत में 20% की कमी।
- भारत में शराब बिक्री में 7% की वृद्धि हो रही है, लेकिन प्रति व्यक्ति खपत पश्चिमी देशों से काफी कम है (3 लीटर बनाम 8-9 लीटर)।
- स्वास्थ्य जागरूकता और ‘वेलनेस’ को प्राथमिकता देना शराब छोड़ने का एक बड़ा कारण है, ‘हैंगओवर’ के बजाय स्वस्थ जीवनशैली पर जोर।
- स्मार्टफोन कैमरे और सोशल मीडिया के कारण बढ़ती सामाजिक निगरानी भी एक महत्वपूर्ण कारक है।
- सार्वजनिक शर्मिंदगी, नौकरी जाने और कानूनी परिणामों का डर लोगों को शराब के अत्यधिक सेवन से दूर कर रहा है।
Keep reading साधनान्यूज़.com for news updates.
स्रोत: Dainik Bhaskar
अधिक पढ़ने के लिए: Education Updates
