ईरान-अमेरिका टकराव: ओमान में परोक्ष वार्ता, लेकिन सैन्य तनाव चरम पर Iran Us Oman Talks Tension
Election news: Political update: मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच, ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। हाल ही में ओमान की राजधानी मस्कट में हुई परोक्ष वार्ता से वैश्विक समुदाय की उम्मीदें जगी थीं, लेकिन बातचीत के स्वरूप और दोनों पक्षों के कड़े रुख ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रयास में सीधे संवाद से परहेज किया गया, जिससे यह साफ हो गया कि दोनों देशों के बीच अविश्वास की गहरी खाई मौजूद है।
ओमान की मध्यस्थता में हुई यह वार्ता अपने आप में अनूठी थी। ईरानी और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल एक-दूसरे के सामने नहीं बैठे, बल्कि ओमान के राजनयिकों ने संदेशवाहक की भूमिका निभाई। ईरान अपनी बात ओमान को बताता, जो उसे अमेरिकी पक्ष तक पहुंचाता, और फिर अमेरिकी प्रतिक्रिया को ईरानी प्रतिनिधियों तक वापस लाया जाता। इस परोक्ष संवाद प्रणाली ने वार्ता की गति को धीमा कर दिया और इसकी प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए।
वार्ता से पहले जिस तरह से दोनों ओर से उग्र बयानों का दौर चला और क्षेत्र में भारी सैन्य हथियारों की तैनाती की गई, उसने यह स्पष्ट कर दिया था कि यह कूटनीतिक मुलाकात महज एक औपचारिकता मात्र प्रतीत होगी। ओमान ने इस बात की पुष्टि की कि उसके विदेश मंत्री ने मस्कट में ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडलों से अलग-अलग मुलाकात कर परमाणु मुद्दे पर चर्चा को आगे बढ़ाया। हालांकि, बताया जाता है कि वार्ता स्थल पर ईरानी पक्ष इस बात से खफा था कि अमेरिकी दल में एडमिरल ब्रैड कूपर जैसे वरिष्ठ सैन्य अधिकारी शामिल थे। यह संकेत देता है कि ईरान अमेरिकी मंशा को लेकर कितना सशंकित था।
पिछले वर्ष ईरान के परमाणु ढांचे पर हुए अमेरिकी हमले के बाद यह पहली औपचारिक वार्ता थी, लेकिन इससे पहले ही बयानबाजी, सैन्य जमावड़े और परोक्ष धमकियों ने माहौल को अत्यधिक विस्फोटक बना दिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई को खुलकर चेतावनी देते हुए कहा था कि उन्हें ‘बहुत चिंतित’ रहना चाहिए। यह चेतावनी ऐसे समय में आई जब ईरान के भीतर सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर कठोर कार्रवाई की गई थी, इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाए गए थे और सड़कों पर व्यापक असंतोष उभरा था।
* **अप्रत्यक्ष कूटनीति:** ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता ओमान की मध्यस्थता से परोक्ष रूप से हुई, जिसमें प्रतिनिधिमंडल सीधे आमने-सामने नहीं आए।
* **बढ़ता सैन्य तनाव:** बातचीत से पहले दोनों देशों द्वारा धमकी भरे बयान और खाड़ी क्षेत्र में भारी हथियारों की तैनाती ने तनाव बढ़ा दिया।
* **ईरान की आपत्ति:** ईरानी पक्ष ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में सैन्य अधिकारियों, जैसे एडमिरल ब्रैड कूपर, की मौजूदगी पर आपत्ति जताई।
* **ट्रंप की चेतावनी:** अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई को ‘बहुत चिंतित’ रहने की खुली चेतावनी दी।
* **अलग-अलग एजेंडे:** अमेरिका परमाणु कार्यक्रम के साथ-साथ ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता और क्षेत्रीय व्यवहार पर चर्चा चाहता था, जबकि ईरान केवल परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों को हटाने तक सीमित रहना चाहता था।
ओमान की राजधानी मस्कट में हुई इस वार्ता में ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिका की ओर से विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेड कुश्नर जैसे उच्चाधिकारी शामिल हुए। वार्ता शुरू होने से पहले भी अनिश्चितता बनी रही, क्योंकि खबरें थीं कि इसकी आधिकारिक शुरुआत टाल दी गई है। हालांकि, बाद में यह स्पष्ट हुआ कि संदेश ओमान के माध्यम से आदान-प्रदान किए जा रहे थे। वार्ता के मुख्य मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच गहरा मतभेद था। अमेरिका चाहता था कि परमाणु कार्यक्रम के अलावा ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता, क्षेत्र में सशस्त्र समूहों को उसके समर्थन और अपने नागरिकों के साथ उसके व्यवहार पर भी चर्चा हो। लेकिन तेहरान ने साफ कह दिया था कि बातचीत केवल उसके परमाणु कार्यक्रम और उस पर लगे प्रतिबंधों को हटाने तक सीमित रहेगी, जिससे वार्ता की सफलता की संभावनाएं धूमिल हो गईं।
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- ईरान और अमेरिका के बीच ओमान में परोक्ष वार्ता हुई, जिसमें सीधे संवाद से परहेज किया गया।
- बातचीत से पहले दोनों देशों द्वारा कड़े धमकी भरे बयान और सैन्य जमावड़े ने तनाव बढ़ा दिया था।
- ईरान ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में सैन्य अधिकारियों, जैसे एडमिरल ब्रैड कूपर, की उपस्थिति पर आपत्ति व्यक्त की।
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई को ‘बहुत चिंतित’ रहने की चेतावनी दी।
- अमेरिका परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइलों और क्षेत्रीय व्यवहार पर चर्चा करना चाहता था, जबकि ईरान केवल परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंध हटाने पर केंद्रित रहा।
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स्रोत: Prabhasakshi
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