ओमान में परोक्ष वार्ता: ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव, खाड़ी में गहराते चिंता क… Oman Iran Us Gulf Tension

Leader spotlight: Political update: खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक चिंताओं का सबब बन चुका है, जहाँ ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जारी गतिरोध अब एक नया मोड़ ले चुका है। हाल ही में ओमान की राजधानी मस्कट में हुई वार्ता, जिसमें दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए, परोक्ष रूप से संपन्न हुई। इसका अर्थ यह था कि ईरानी और अमेरिकी अधिकारी सीधे आमने-सामने बातचीत करने के बजाय, ओमान के माध्यम से अपने संदेशों का आदान-प्रदान कर रहे थे। ओमान के राजनयिकों ने एक पुल का काम करते हुए, एक पक्ष की बात दूसरे तक पहुंचाई और फिर प्रतिक्रिया वापस लौटाई।

इस वार्ता से पहले दोनों ही देशों की ओर से जिस तरह की तीखी बयानबाजी और सैन्य जमावड़ा देखा गया, उससे यह स्पष्ट संकेत मिल गया था कि यह कूटनीतिक प्रयास मात्र एक औपचारिकता हो सकती है। भारी हथियारों की तैनाती और एक-दूसरे के खिलाफ खुलेआम धमकियों ने माहौल को पहले से ही बारूद के ढेर पर ला दिया था।

बताया जा रहा है कि वार्ता स्थल पर ईरान इस बात से खासा नाराज था कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में नौसेना के एडमिरल ब्रैड कूपर जैसे वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मौजूद थे। ईरान इसे अपने प्रति एक उकसावे के तौर पर देख रहा था, खासकर तब जब बीते वर्ष उसके परमाणु प्रतिष्ठानों पर कथित अमेरिकी हमले के बाद यह पहली ‘औपचारिक’ वार्ता थी। इस घटनाक्रम ने पहले से ही नाजुक संबंधों में और कड़वाहट घोल दी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई को सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी थी कि उन्हें ‘बेहद चिंतित’ रहना चाहिए। यह चेतावनी ऐसे समय में आई जब ईरान अपने भीतर सरकार विरोधी प्रदर्शनों और इंटरनेट प्रतिबंधों का सामना कर रहा था, जिससे सड़कों पर गहरा असंतोष फैल रहा था। इन आंतरिक चुनौतियों के बीच, बाहरी दबाव ने ईरान की स्थिति को और जटिल बना दिया।

मस्कट में हुई इस महत्वपूर्ण वार्ता में ईरान का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने किया, जबकि अमेरिका की ओर से विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेड कुश्नर शामिल थे। वार्ता शुरू होने से पहले भी काफी अनिश्चितता बनी हुई थी। खबरें थीं कि आधिकारिक शुरुआत टल गई है, लेकिन बाद में यह साफ हुआ कि संदेशों का आदान-प्रदान ओमान की मध्यस्थता में निरंतर जारी था।

अमेरिका ने वार्ता से पहले अपनी अपेक्षाएं स्पष्ट कर दी थीं। वह चाहता था कि परमाणु कार्यक्रम के साथ-साथ ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं, क्षेत्र में सशस्त्र समूहों को उसके समर्थन और अपने नागरिकों के साथ उसके व्यवहार जैसे व्यापक मुद्दों पर भी चर्चा हो। हालांकि, तेहरान ने साफ तौर पर कहा था कि वह बातचीत को केवल अपने परमाणु कार्यक्रम और उस पर लगे प्रतिबंधों को हटाने तक ही सीमित रखेगा। यह मूलभूत असहमति ही वार्ता की सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी।

यह परोक्ष वार्ता दर्शाती है कि ईरान और अमेरिका के बीच विश्वास की कमी कितनी गहरी है। भविष्य में इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए अभी भी बहुत लंबा रास्ता तय करना है। Stay updated with साधनान्यूज़.com for more news।

  • ओमान की राजधानी मस्कट में ईरान और अमेरिका के बीच परोक्ष (अप्रत्यक्ष) वार्ता हुई।
  • दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने सीधे बातचीत के बजाय ओमान की मध्यस्थता से संदेशों का आदान-प्रदान किया।
  • वार्ता से पहले तीखी बयानबाजी और भारी सैन्य जमावड़े ने क्षेत्र में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया था।
  • ईरान ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में नौसेना के एडमिरल जैसे सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी पर कड़ी आपत्ति जताई।
  • अमेरिका व्यापक मुद्दों जैसे परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमता और मानवाधिकारों पर चर्चा चाहता था।
  • ईरान ने वार्ता को केवल परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों को हटाने तक सीमित रखने की बात पर जोर दिया।

Keep reading साधनान्यूज़.com for news updates.

स्रोत: Prabhasakshi

अधिक पढ़ने के लिए: Education Updates

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *