मातृत्व की उलझन: समाज को ‘कोख’ चाहिए, ‘स्त्री’ क्यों नहीं? राजनीति Women’s Identity Motherhood Politics

समाज में महिलाओं पर शादी के बाद संतानोत्पत्ति का भारी दबाव होता है, लेकिन जैसे ही गर्भावस्था वास्तविक और शारीरिक रूप से प्रकट होती है, समाज असहज हो जाता है। यह विरोधाभास अभिनेत्री सोनम कपूर की गर्भावस्था के दौरान की पोशाक को लेकर हुए विवाद से उजागर हुआ। समाज एक ओर माँ बनने की अपेक्षा रखता है, वहीं दूसरी ओर माँ बनने के बाद महिला से अपनी पहचान और इच्छाओं का त्याग करने की मांग करता है। मातृत्व को आदर्श माना जाता है, पर गर्भवती महिला की शारीरिक जरूरतों और आत्मसम्मान की अनदेखी की जाती है। समाज को ‘कोख’ चाहिए, ‘स्त्री’ नहीं। गर्भवती महिला को एक पूर्ण मनुष्य के रूप में स्वीकारने में समाज हिचकिचाता है।

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