संसदीय गतिरोध: लोकतांत्रिक परम्पराओं का क्षरण और जवाबदेही का सवाल Parliamentary Gridlock Democracy Crisis
संसद में बजट सत्र के दौरान लगातार हंगामे और लोकतांत्रिक परंपराओं के क्षरण पर चिंता व्यक्त की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब देने से रोका गया, जैसा कि 2004 में मनमोहन सिंह के साथ भी हुआ था। इस बार पीएम का प्रस्ताव के मतदान के समय अनुपस्थित रहना एक नया उदाहरण बना। सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी दल, विशेषकर कांग्रेस, दोनों ही संसद के सुचारु संचालन में रुचि नहीं दिखा रहे हैं, जिससे महत्वपूर्ण चर्चाएँ बाधित हो रही हैं। भाजपा को गतिरोध से असहज सवालों से बचने का मौका मिलता है, जबकि विपक्ष इसे जनता तक अपनी बात पहुँचाने का प्रभावी तरीका मानता है। संसदीय अवरोध की यह प्रवृत्ति पूर्व में भी रही है, जब विपक्ष में रहते हुए नेताओं ने इसे लोकतंत्र का हिस्सा बताया था।
