एक नज़र में
- भारत ने फाइनल में चीन को 1-0 से हराया
- लालरेमसियामी ने 10वें मिनट में किया विजयी गोल
- सविता पूनिया ने शानदार बचाव कर बचाई बढ़त
भारत ने 44 साल के लंबे इंतजार के बाद एशियन गेम्स में महिला हॉकी का स्वर्ण पदक जीत लिया है। फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने चीन को 1-0 से हराया। इस जीत के साथ ही भारतीय टीम ने आगामी ओलंपिक के लिए भी अपना स्थान पक्का कर लिया है।
मैच का एकमात्र निर्णायक गोल लालरेमसियामी ने किया। उन्होंने मैच के 10वें मिनट में साक्षी के पास पर शानदार रिवर्स शॉट लगाकर गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचाया। यह लालरेमसियामी का 200वां मैच था। इस गोल की बदौलत भारत ने पहले क्वार्टर में 1-0 की बढ़त बनाई थी।
मैच के दूसरे क्वार्टर में चीनी टीम ने बराबरी करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय गोलकीपर सविता पूनिया ने शानदार बचाव किया। 23वें मिनट में मिले पेनेल्टी स्ट्रोक को सविता ने अपनी बाईं ओर डाइव लगाकर नाकाम कर दिया, जिससे भारत की बढ़त अंत तक बरकरार रही।
गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच यह फाइनल मुकाबला तय समय से 45 मिनट की देरी से शुरू हुआ था, क्योंकि दोनों टीमों की बसें रास्ते में ट्रैफिक में फंस गई थीं।
भारत ने इससे पहले एशियन गेम्स में आखिरी बार महिला हॉकी का स्वर्ण पदक 1982 में जीता था। इसके बाद 1998 और 2018 में भी टीम फाइनल तक पहुंची थी, जहां उसे रजत पदक से संतोष करना पड़ा था। अब चार दशक बाद टीम एक बार फिर चैंपियन बनी है।
खबर का संदर्भ
यह जीत भारतीय महिला हॉकी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, क्योंकि टीम ने 1982 के बाद पहली बार एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक हासिल किया है। मैच में रणनीतिक रक्षा और शुरुआती बढ़त ने भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई।
EXPLAINED
आपके सवाल, सीधे जवाब
01. भारत ने एशियन गेम्स में महिला हॉकी का स्वर्ण पदक इससे पहले कब जीता था?
भारत ने आखिरी बार 1982 में यह स्वर्ण पदक जीता था।
02. भारत के लिए फाइनल में एकमात्र गोल किसने किया?
लालरेमसियामी ने मैच के 10वें मिनट में यह गोल किया।
