📅 08 अप्रैल 2026 | SadhnaNEWS Desk
🔑 मुख्य बातें
- घर में खंडित मूर्तियां रखने से पूजा में एकाग्रता भंग होती है और मन अशांत होता है।
- पूजा स्थल घर के उत्तर या पूर्व दिशा में होना चाहिए, क्योंकि ये दिशाएं देवी-देवताओं की पूजा के लिए शुभ मानी जाती हैं।
- सोना, चांदी, तांबा, पीतल, स्फटिक और पारद से बनी मूर्तियां घर के लिए शुभ मानी जाती हैं।
उज्जैन: हर घर में मंदिर का एक विशेष स्थान होता है, जहां देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित की जाती हैं। यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि इसका गहरा संबंध हमारे मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य से भी है। शास्त्रों के अनुसार, घर में स्थापित मूर्तियों की विधिवत पूजा करने से सुख-शांति बनी रहती है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, वास्तु शास्त्र में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि घर में खंडित मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। खंडित मूर्तियों की पूजा करने से ध्यान भटकता है और मन अशांत होता है, जिससे पूजा में एकाग्रता नहीं बन पाती। यही कारण है कि खंडित मूर्तियों का विसर्जन करने का विधान है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूजा स्थल हमेशा घर के उत्तर या पूर्व दिशा में होना चाहिए। ये दोनों दिशाएं देवी-देवताओं की पूजा के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती हैं। पूजा केवल हाथ जोड़कर मंत्र पढ़ने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसे ध्यान और भक्ति के साथ करना चाहिए। जब मूर्ति पूरी होती है, तो पूजा करने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से पूजा में केंद्रित रहता है।
मान्यता है कि एकाग्र और शांत मन से की गई पूजा जल्दी सफल होती है। घर में मूर्तियों की स्थापना करते समय कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। हमेशा अखंडित मूर्तियों का चयन करना चाहिए और घर के मंदिर में नियमित रूप से साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए। पूजा के समय हमारा पूरा ध्यान केंद्रित रहना चाहिए, जिससे भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा दोनों मजबूत हों।
घर के मंदिर के लिए सोना, चांदी, तांबा, पीतल, स्फटिक और पारद से बनी मूर्तियां बहुत शुभ मानी जाती हैं। लोहे, स्टील और एल्यूमीनियम से बनी मूर्तियां पूजा के लिए शुभ नहीं मानी जाती हैं, क्योंकि पूजा में पानी, दूध और दही से मूर्तियों का अभिषेक किया जाता है, जिससे ये धातुएं खराब हो सकती हैं। यदि आप धातु की मूर्ति नहीं रखना चाहते हैं, तो मिट्टी या पत्थर से बनी मूर्ति भी श्रेष्ठ मानी जाती है।
इसलिए, घर में सुख-शांति और समृद्धि बनाए रखने के लिए इन नियमों का पालन करना चाहिए। सही दिशा में स्थापित और विधिवत पूजी गई मूर्तियां घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं और परिवार के सदस्यों को मानसिक शांति प्रदान करती हैं।
आज के समय में, धर्म और आध्यात्मिकता का महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि यह हमें तनाव और चिंता से मुक्ति दिलाता है। घर में सही तरीके से की गई पूजा न केवल धार्मिक कर्तव्य है, बल्कि यह हमारे जीवन को बेहतर बनाने का एक माध्यम भी है।
🔍 खबर का विश्लेषण
यह खबर घर में पूजा-पाठ के नियमों और मूर्तियों के महत्व को बताती है। यह उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो अपने घरों में सुख-शांति और समृद्धि बनाए रखना चाहते हैं। यह खबर धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों को जोड़ती है, जिससे पाठकों को अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद मिलती है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ घर में खंडित मूर्तियां क्यों नहीं रखनी चाहिए?
खंडित मूर्तियों की पूजा करने से ध्यान भटकता है और मन अशांत होता है, जिससे पूजा में एकाग्रता नहीं बन पाती है। इसलिए खंडित मूर्तियों का विसर्जन करने का विधान है।
❓ पूजा स्थल के लिए कौन सी दिशाएं शुभ मानी जाती हैं?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूजा स्थल हमेशा घर के उत्तर या पूर्व दिशा में होना चाहिए। ये दोनों दिशाएं देवी-देवताओं की पूजा के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती हैं।
❓ घर के मंदिर के लिए किस धातु की मूर्तियां शुभ होती हैं?
सोना, चांदी, तांबा, पीतल, स्फटिक और पारद से बनी मूर्तियां घर के लिए बहुत शुभ मानी जाती हैं। इन धातुओं से बनी मूर्तियां सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं।
❓ पूजा करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
पूजा करते समय हमारा पूरा ध्यान केंद्रित रहना चाहिए, जिससे भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा दोनों मजबूत हों। मन को शांत और एकाग्र रखकर पूजा करनी चाहिए।
❓ अगर धातु की मूर्ति नहीं रखना चाहते हैं, तो क्या विकल्प है?
अगर आप धातु की मूर्ति नहीं रखना चाहते हैं, तो मिट्टी या पत्थर से बनी मूर्ति भी श्रेष्ठ मानी जाती है। मिट्टी और पत्थर की मूर्तियां भी घर में सकारात्मक ऊर्जा लाती हैं।
📰 और पढ़ें:
Latest National News | Top Cricket Updates | Business & Market
हर अपडेट सबसे पहले पाने के लिए SadhnaNEWS.com को बुकमार्क करें।
Source: Agency Inputs
| Published: 08 अप्रैल 2026
