एक नज़र में
- चारधाम यात्रा के दौरान सितंबर के मध्य तक 800 टन से अधिक कचरा एकत्र हुआ।
- केदारनाथ क्षेत्र में अप्रैल से अगस्त के बीच 50.30 टन कचरा जमा हुआ।
- 'कैरी मी बैक' अभियान के तहत लगभग पांच हजार तीर्थयात्रियों ने 12 टन से अधिक कंप्रेस्ड प्लास्टिक वापस नीचे लाया।
हिमालयी क्षेत्र में तीर्थयात्रा और पर्यटन के नाम पर बढ़ती भीड़ और उपभोक्तावादी जीवनशैली से वहां के नाजुक पर्यावरण पर भारी दबाव पड़ रहा है। चारधाम यात्रा के दौरान सितंबर के मध्य तक 800 टन से अधिक कचरा एकत्र होने की सूचना मिली है, जिसमें केदारनाथ में अप्रैल से अगस्त के बीच जमा 50.30 टन कचरा भी शामिल है।
पहाड़ी क्षेत्रों में वाहनों की लंबी कतारें, अनियोजित होटल-ढाबे और प्लास्टिक कचरा जलस्रोतों व वन्यजीवन के लिए बड़ा खतरा बन रहे हैं। हालांकि, 'कैरी मी बैक' जैसे अभियानों से यह साबित हुआ है कि यदि श्रद्धालुओं को सहभागी बनाया जाए तो वे पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, तीर्थस्थलों की वहन क्षमता का वैज्ञानिक अध्ययन होना चाहिए और आगंतुकों की संख्या निर्धारित की जानी चाहिए। इसके अलावा सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रभावी नियंत्रण और कचरा प्रबंधन की पुख्ता व्यवस्था जरूरी है ताकि हिमालय की पवित्रता और पर्यावरण को बचाया जा सके।
खबर का संदर्भ
यह लेख हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते धार्मिक पर्यटन और उसके परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाले पर्यावरणीय संकट का विश्लेषण करता है। इसमें अनियोजित निर्माण, कचरा प्रबंधन की कमी और पहाड़ों की वहन क्षमता से अधिक भीड़ को मुख्य समस्याओं के रूप में रेखांकित किया गया है।
EXPLAINED
आपके सवाल, सीधे जवाब
01. चारधाम यात्रा के दौरान कितना कचरा एकत्र हुआ?
सितंबर के मध्य तक 800 टन से अधिक कचरा एकत्र होने की सूचना मिली।
02. केदारनाथ क्षेत्र में कितना कचरा जमा हुआ?
अप्रैल से अगस्त के बीच केदारनाथ में 50.30 टन कचरा जमा हुआ।
