📅 09 अप्रैल 2026 | SadhnaNEWS Desk
🔑 मुख्य बातें
- शशि थरूर ने भारत की इनोवेशन क्षमता पर जोर दिया।
- भारत अब केवल कम लागत वाला बैक-ऑफिस नहीं है।
- जीसीसी भारत में इनोवेशन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गए हैं।
नई दिल्ली: कांग्रेस नेता शशि थरूर ने हाल ही में एक कॉलम में भारत की इनोवेशन क्षमता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल कम लागत वाला बैक-ऑफिस नहीं है, बल्कि यह इनोवेशन, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और तकनीकी महत्वाकांक्षा का केंद्र बन रहा है। उनका यह लेख भारत की बदलती भूमिका और वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसके बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालता है।
थरूर ने अपने कॉलम में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के उदय का उल्लेख किया, जिन्हें बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने दक्षता बढ़ाने और लागत कम करने के लिए स्थापित किया था। भारत अपने बड़े, शिक्षित और अंग्रेजी भाषी वर्कफोर्स के कारण जीसीसी का एक स्वाभाविक केंद्र बन गया। इन केंद्रों में, भारतीय कर्मचारी दुनिया भर की कंपनियों के लिए नियमित आईटी कार्य और व्यावसायिक प्रक्रियाओं का संचालन करते थे।
हालांकि, भारतीय वर्कफोर्स की क्षमता इससे कहीं अधिक थी। कंपनियों ने धीरे-धीरे अधिक जटिल कार्य जैसे एनालिटिक्स, समस्या-समाधान और साझा सेवाएं भी स्थानांतरित करने शुरू कर दिए। अब जीसीसी रणनीति बना रहे हैं, परियोजनाएं डिजाइन कर रहे हैं और बौद्धिक संपदा का सृजन कर रहे हैं। भारत-आधारित जीसीसी अब एंड-टु-एंड स्वामित्व मॉडल पर काम कर रहे हैं, जहां भारतीय टीमें परिकल्पना से लेकर निर्माण, परीक्षण और डिप्लॉयमेंट तक हर चरण का नेतृत्व करती हैं।
आज भारत में 1,800 से अधिक जीसीसी हैं, जिनमें लगभग 20 लाख पेशेवर इंजीनियरिंग, फाइनेंस, लीगल, डिजाइन और रिसर्च जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हैं। यह नेटवर्क एक शक्तिशाली इनोवेशन चक्र तैयार करता है। थरूर का मानना है कि आज यह स्थिति बन गई है कि सिलिकॉन वैली में जिस प्रोडक्ट की कल्पना की गई हो, उसे बेंगलुरु में विकसित किया जा सकता है, हैदराबाद में उसका परीक्षण किया जा सकता है, पुणे में उसे सुरक्षित रखा जा सकता है और कुछ ही दिनों में उसे वैश्विक स्तर पर डिप्लॉय किया जा सकता है।
थरूर के अनुसार, भारत की यह क्षमता न केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी, बल्कि यह देश को वैश्विक मंच पर एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में भी मदद करेगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को अपनी इस क्षमता को पहचानना चाहिए और इसे और विकसित करने के लिए नीतियों का निर्माण करना चाहिए। इससे देश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा।
थरूर के इस कॉलम ने भारत की इनोवेशन क्षमता पर एक नई बहस छेड़ दी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और उद्योग जगत इस पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं और भारत को दुनिया की इनोवेशन राजधानी बनाने के लिए क्या कदम उठाते हैं। यह निश्चित रूप से भारत के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।
🔍 खबर का विश्लेषण
शशि थरूर का यह कॉलम भारत की बदलती भूमिका और वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसके बढ़ते महत्व को दर्शाता है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत की आर्थिक और तकनीकी प्रगति की संभावनाओं पर प्रकाश डालती है। यह देश के नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के लिए एक प्रेरणा का स्रोत हो सकता है, जो भारत को दुनिया की इनोवेशन राजधानी बनाने के लिए काम कर रहे हैं।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ भारत में जीसीसी का उदय क्यों महत्वपूर्ण है?
जीसीसी भारत में इनोवेशन और तकनीकी विकास को बढ़ावा दे रहे हैं। वे बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भारतीय प्रतिभा का उपयोग करने और अपनी उत्पादकता बढ़ाने में मदद करते हैं।
❓ भारत की इनोवेशन क्षमता को और कैसे बढ़ाया जा सकता है?
भारत की इनोवेशन क्षमता को बढ़ाने के लिए शिक्षा, अनुसंधान और विकास में निवेश बढ़ाना होगा। साथ ही, सरकार को ऐसी नीतियां बनानी होंगी जो इनोवेशन को प्रोत्साहित करें।
❓ शशि थरूर के कॉलम का मुख्य संदेश क्या है?
शशि थरूर के कॉलम का मुख्य संदेश यह है कि भारत में दुनिया की इनोवेशन राजधानी बनने की क्षमता है। इसके लिए देश को अपनी ताकत को पहचानना होगा और सही दिशा में प्रयास करने होंगे।
❓ भारत में कितने जीसीसी हैं?
आज भारत में 1,800 से अधिक जीसीसी हैं, जिनमें लगभग 20 लाख पेशेवर कार्यरत हैं। ये केंद्र इंजीनियरिंग, फाइनेंस, लीगल, डिजाइन और रिसर्च जैसे क्षेत्रों में फैले हुए हैं।
❓ भारत की इनोवेशन क्षमता का भविष्य क्या है?
भारत की इनोवेशन क्षमता का भविष्य उज्ज्वल है। देश में प्रतिभा, संसाधन और अनुकूल नीतियां मौजूद हैं। यदि इन सभी का सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो भारत निश्चित रूप से दुनिया की इनोवेशन राजधानी बन सकता है।
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Source: Agency Inputs
| Published: 09 अप्रैल 2026
