📅 25 मार्च 2026 | SadhnaNEWS Desk
🔑 मुख्य बातें
- वृंदावन में बंदर श्रद्धालुओं के चश्मे छीनकर फ्रूटी या केले की मांग करते हैं।
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सहित कई राष्ट्रपतियों ने वृंदावन का दौरा किया है, लेकिन बंदरों की समस्या जस की तस है।
- प्रशासन को बंदरों के आतंक से श्रद्धालुओं और वीवीआईपी को बचाने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।
वृंदावन: धार्मिक स्थलों पर बंदरों का आतंक एक गंभीर समस्या बनी हुई है। वृंदावन जैसे पवित्र स्थलों पर बंदरों से मुक्ति क्यों नहीं मिल पाती, यह एक बड़ा सवाल है। इन स्थानों पर आने वाले श्रद्धालु कब तक बंदरों का आतंक झेलते रहेंगे और कब तक इनका शिकार होते रहेंगे? हाल ही में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 19 मार्च को वृंदावन आईं, जो उनके कार्यकाल में दूसरी यात्रा थी। इससे पहले, प्रणब मुखर्जी और रामनाथ कोविंद भी राष्ट्रपति रहते हुए दो बार वृंदावन आए थे। राष्ट्रपति मुर्मू वृंदावन के तीन दिवसीय प्रवास पर आने वाली पहली राष्ट्रपति हैं।
देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद और ज्ञानी जैल सिंह भी एक-एक बार वृंदावन आए थे। उपराष्ट्रपति पद पर रहते हुए डॉ. शंकरदयाल शर्मा, आर. वेंकटरमन और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भी वृंदावन अपनी धार्मिक यात्रा पर आ चुके हैं। निवर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी दो बार वृंदावन आए थे और आश्रय सदन में वृद्ध विधवा माताओं से मुलाकात की थी। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए प्रणब मुखर्जी पहली बार 16 नवंबर 2014 को अक्षयपात्र में चंद्रोदय मंदिर के भूमि पूजन में आए थे, और दूसरी बार 18 नवंबर 2015 को चैतन्य महाप्रभु के वृंदावन आगमनोत्सव के पांच सौ वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में आए थे। राष्ट्रपति पद पर रहते ज्ञानी जैल सिंह 1987 में वृंदावन आए और रंगजी मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे।
1957 में देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद वृंदावन आए। उपराष्ट्रपति पद पर रहते 1985 में आर. वेंकटरमन, 1993 में डॉ. शंकरदयाल शर्मा और 1959 में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन वृंदावन आ चुके हैं। राष्ट्रपति या कोई वीवीआईपी जब भी वृंदावन आता है, उनकी सुरक्षा के साथ-साथ सबसे बड़ा काम होता है वीवीआईपी को यहां के झपटमार बंदरों से बचाना।
ये बंदर झपटमार कर श्रद्धालुओं का चश्मा उतारते हैं और किसी ऊंची जगह, पेड़ या दीवार पर जाकर बैठ जाते हैं। ये चश्मा तभी लौटाते हैं जब उन्हें खाने के लिए फ्रूटी, केला या दूसरे खाने के सामान दिए जाएं। बंदरों की इस समस्या से निपटने के लिए प्रशासन को उचित कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि श्रद्धालुओं और वीवीआईपी को सुरक्षित वातावरण मिल सके।
धार्मिक स्थलों पर बंदरों की समस्या एक जटिल मुद्दा है, जिस पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। यह न केवल श्रद्धालुओं की सुरक्षा का प्रश्न है, बल्कि इन स्थलों की प्रतिष्ठा का भी विषय है। उचित प्रबंधन और निवारक उपायों के माध्यम से, इस समस्या का समाधान किया जा सकता है, जिससे धार्मिक अनुभव सुखद और सुरक्षित हो सके। राजनीति और प्रशासन को मिलकर इस दिशा में काम करना होगा।
🔍 खबर का विश्लेषण
यह खबर धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन की कमियों को उजागर करती है। बंदरों की समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि यह श्रद्धालुओं के अनुभव को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। स्थानीय प्रशासन और धार्मिक संगठनों को मिलकर इसका समाधान खोजना चाहिए, ताकि वृंदावन जैसे पवित्र स्थलों की गरिमा बनी रहे और श्रद्धालु बिना किसी डर के अपनी धार्मिक यात्रा कर सकें। यह चुनावी मुद्दा भी बन सकता है, क्योंकि राजनीति में धार्मिक भावनाएं महत्वपूर्ण होती हैं।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ वृंदावन में बंदरों की समस्या क्या है?
वृंदावन में बंदर श्रद्धालुओं के चश्मे और अन्य सामान छीन लेते हैं और उन्हें वापस करने के लिए खाने की मांग करते हैं, जिससे श्रद्धालुओं को काफी परेशानी होती है।
❓ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू वृंदावन कब आईं?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 19 मार्च को वृंदावन आईं, जो उनके कार्यकाल में दूसरी यात्रा थी। इससे पहले भी कई राष्ट्रपति वृंदावन आ चुके हैं।
❓ बंदरों से निपटने के लिए क्या किया जा सकता है?
बंदरों से निपटने के लिए प्रशासन को उचित कदम उठाने चाहिए, जैसे कि बंदरों को पकड़कर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर छोड़ना और श्रद्धालुओं को बंदरों से बचने के लिए जागरूक करना।
❓ इस समस्या का श्रद्धालुओं पर क्या प्रभाव पड़ता है?
बंदरों के आतंक से श्रद्धालुओं को डर और असुरक्षा का अनुभव होता है, जिससे उनकी धार्मिक यात्रा का अनुभव नकारात्मक हो जाता है।
❓ क्या राजनीति में इस मुद्दे का कोई महत्व है?
हां, धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा और प्रबंधन के मुद्दे राजनीति में महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि धार्मिक भावनाएं लोगों के वोटिंग पैटर्न को प्रभावित कर सकती हैं।
📰 और पढ़ें:
Top Cricket Updates | Latest National News | Bollywood Highlights
ताज़ा और विश्वसनीय समाचारों के लिए SadhnaNEWS.com से जुड़े रहें।
Source: Agency Inputs
| Published: 25 मार्च 2026
