पंडित विजयशंकर मेहता: राजनीति में आध्यात्मिक संतुलन की आवश्यकता? Balance Spirituality Politics India
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पंडित विजयशंकर मेहता: राजनीति में आध्यात्मिक संतुलन की आवश्यकता? Balance Spirituality Politics India
साधनान्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, पंडित विजयशंकर मेहता के ताज़ा कॉलम में राजनीति और आध्यात्म के बीच संतुलन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है।
भारत, विश्व की सबसे अधिक भाषा भाषी देशों में से एक है, जहाँ धर्म और अध्यात्म ने भाषा के प्रयोग को अद्भुत आयाम दिए हैं।
लेकिन मेहता जी इस कॉलम में तर्क देते हैं कि सच्ची राजनीति, नेताओं के लिए केवल प्रभावशाली वक्तृत्व से परे है।
उन्होंने इस विचार को आगे बढ़ाते हुए कहा कि सच्चे नेता, चाहे वे कांग्रेस के हों या बीजेपी के, अच्छे श्रोता बनकर ही जनता की आवाज़ समझ सकते हैं।
मृदु वक्ता बनकर ही वे जनता के हितों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सकते हैं।
मेहता जी के अनुसार, सत्य और आत्मा की अनुभूति भाषा से परे है; यह मौन और विनम्रता में निहित है।
एक सफल नेता चुनावों में जीत के लिए ही नहीं, बल्कि जनता की सेवा के लिए भी कार्य करता है।
उनका मानना है कि केवल सत्ता की चाह रखने वाले नेता ही आक्रामक राजनीति का सहारा लेते हैं, जबकि सच्चे नेता जनता के प्रति समर्पण और सेवाभाव रखते हैं।
आज की राजनीति में, जहां चुनाव प्रचार और नेताओं के बीच तीखे वाद-विवाद आम बात है, मेहता जी का यह विचार एक नया आयाम जोड़ता है।
उनका संदेश स्पष्ट है: राजनीति में सफलता के लिए केवल शक्तिशाली भाषण ही काफी नहीं, बल्कि सच्ची समझ, विनम्रता और जनता के प्रति समर्पण भी आवश्यक है।
यह कॉलम बीजेपी और कांग्रेस जैसे प्रमुख दलों के लिए भी एक चिंतन का विषय प्रस्तुत करता है।
इससे यह समझने में मदद मिलती है कि आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाकर ही राजनीति में सुधार लाया जा सकता है।
- राजनीति में आध्यात्मिक मूल्यों का महत्व
- अच्छे श्रोता और मृदु वक्ता बनने की आवश्यकता
- नेताओं के लिए जनता की सेवा सर्वोपरि
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Posted on 23 September 2025 | Visit साधनान्यूज़.com for more stories.
