पॉश एक्ट छूट: क्या राजनीतिक दलों के लिए नैतिक संकट? राजनीति Political Parties Exempt Posh Act
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पॉश एक्ट छूट: क्या राजनीतिक दलों के लिए नैतिक संकट? राजनीति Political Parties Exempt Posh Act
साधनान्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, राजनीतिक दलों को पॉश एक्ट, 2013 से मिली छूट एक गंभीर नैतिक प्रश्न उठाती है।
यह छूट, महिला कार्यकर्ताओं की कार्यस्थल सुरक्षा को लेकर चिंता का विषय है।
सुप्रीम कोर्ट का तर्क कि राजनीतिक दलों और उनके सदस्यों के बीच पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी का संबंध नहीं होता, यह तर्क व्यावहारिक रूप से कमजोर लगता है।
कार्यस्थल की संस्कृति, यात्राओं के दौरान साझा आवास, और राजनीतिक दलों की कॉरपोरेट शैली के संचालन को देखते हुए, यह छूट महिला कार्यकर्ताओं के शोषण का मार्ग प्रशस्त करती प्रतीत होती है।
बीजेपी और कांग्रेस जैसे प्रमुख राजनीतिक दल, चुनाव के दौरान और सत्ता में रहते हुए, इस छूट के दायरे में आते हैं।
इससे नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच संबंधों में शक्ति असंतुलन और संभावित शोषण की संभावना बढ़ जाती है।
यह राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को प्रभावित करने वाला एक गंभीर मुद्दा है, जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
इस नैतिक विडंबना को दूर करने और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानूनी और नीतिगत सुधारों की आवश्यकता है।
यह महिलाओं को राजनीति में सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल प्रदान करने के लिए एक आवश्यक कदम होगा।
- पॉश एक्ट की छूट: राजनीतिक दलों के लिए नैतिक संकट?
- महिला कार्यकर्ताओं की सुरक्षा पर गंभीर चिंताएँ
- बीजेपी, कांग्रेस सहित कई पार्टियाँ इस मुद्दे से जुड़ी हैं
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Posted on 22 September 2025 | Keep reading साधनान्यूज़.com for news updates.
