वक़्फ़ अधिनियम: सुप्रीम कोर्ट का फैसला; संवैधानिकता और धर्मनिरपेक्षता का संतुलन? Court Balances Wakf Act Constitutionality
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वक़्फ़ अधिनियम: सुप्रीम कोर्ट का फैसला; संवैधानिकता और धर्मनिरपेक्षता का संतुलन? Court Balances Wakf Act Constitutionality
साधनान्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने वक़्फ़ (संशोधन) अधिनियम 2025 पर अपना अंतरिम आदेश जारी करते हुए संवैधानिकता और धर्मनिरपेक्षता के बीच संतुलन कायम करने का प्रयास किया है।
न्यायालय ने पूरे अधिनियम पर रोक लगाने से इनकार करते हुए, कुछ महत्वपूर्ण प्रावधानों पर अस्थायी रोक लगा दी है।
यह फैसला राजनीतिक दलों, विशेषकर बीजेपी और कांग्रेस, के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह धार्मिक संस्थाओं के प्रशासन और सरकार की भूमिका को लेकर बहस को प्रभावित करेगा।
न्यायालय ने वक़्फ़ परिषदों और बोर्डों में गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या सीमित करने का निर्देश दिया है – केंद्रीय वक़्फ़ परिषद में चार से अधिक गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं होने चाहिए, और राज्य स्तर पर भी यही नियम लागू होगा।
यह निर्णय एक संवेदनशील धार्मिक संस्था के चरित्र को बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक दृष्टि से गैर-मुस्लिम को सीईओ नियुक्त करना पूरी तरह असंवैधानिक नहीं है, लेकिन “जहाँ तक संभव हो” मुस्लिम सीईओ की नियुक्ति ही की जानी चाहिए।
यह फैसला चुनावों से पहले धार्मिक राजनीति पर गहरा प्रभाव डाल सकता है और नेताओं को अपनी रणनीति नया रूप देने पर मजबूर कर सकता है।
इस फैसले से राजनीतिक दलों को अपने चुनावी अभियानों में धार्मिक मुद्दों को संभालने के तरीके पर पुनर्विचार करना होगा।
यह फैसला वक़्फ़ अधिनियम के भविष्य और धार्मिक संस्थाओं के प्रशासन में सरकार की भूमिका को लेकर बहस को और तेज कर सकता है।
- वक़्फ़ परिषदों में गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या सीमित
- मुस्लिम सीईओ की नियुक्ति पर जोर, लेकिन गैर-मुस्लिम सीईओ को पूरी तरह से असंवैधानिक नहीं माना गया
- धार्मिक संस्थाओं के प्रशासन और सरकार की भूमिका पर बहस जारी
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Posted on 22 September 2025 | Stay updated with साधनान्यूज़.com for more news.
