मध्य आयु का राजनीतिक आयाम: क्या नेताओं को भी चाहिए जीवन संतुलन? Midlife Crisis Politics Sandwich Generation
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मध्य आयु का राजनीतिक आयाम: क्या नेताओं को भी चाहिए जीवन संतुलन? Midlife Crisis Politics Sandwich Generation
साधनान्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, पं. विजयशंकर मेहता के ताज़ा कॉलम में मध्य आयु के संघर्षों पर प्रकाश डाला गया है, विशेष रूप से राजनीति के क्षेत्र में।
मेहता ने ‘सैंडविच जनरेशन’ की चुनौतियों को रेखांकित करते हुए बताया है कि कैसे बढ़ती उम्र, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और पारिवारिक जिम्मेदारियाँ नेताओं के लिए भी एक बड़ी बाधा बन सकती हैं।
कांग्रेस और बीजेपी जैसे प्रमुख दलों के नेता भी इस दबाव का सामना करते हैं, चुनावों के तनाव, जनता की अपेक्षाओं और पार्टी के भीतर के राजनीतिक खेलों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती से जूझते हैं।
मेहता ने इस कठिन दौर में शक्ति के उपयोग पर ज़ोर दिया है, यह तर्क देते हुए कि प्रत्येक उम्र में अपनी क्षमताओं का सदुपयोग करना आवश्यक है।
यह राजनीतिक नेताओं के लिए भी प्रासंगिक है, जिन्हें अपनी ऊर्जा का कुशलतापूर्वक उपयोग करते हुए जनता की सेवा करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि शक्ति निष्पक्ष है और सभी उम्रों में उपलब्ध है, बस उसे समझने और उसका उपयोग करने की आवश्यकता है।
अंततः, मेहता का यह लेख राजनीतिक नेताओं को आत्म-चिंतन के लिए प्रेरित करता है, ताकि वे अपने जीवन में संतुलन बना सकें और अपनी शक्ति का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें, चुनावों में जीत और हार से परे।
- मध्य आयु की चुनौतियाँ राजनीति में भी महत्वपूर्ण
- नेताओं के लिए जीवन संतुलन बनाना ज़रूरी
- शक्ति का सदुपयोग: हर उम्र में संभव
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Posted on 18 September 2025 | Keep reading साधनान्यूज़.com for news updates.
