राजनीति में धर्म का प्रभाव: क्या ग्रंथों की सीख नेताओं को मार्गदर्शन देती है? Religion Impacts Politics Ancient Texts
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राजनीति में धर्म का प्रभाव: क्या ग्रंथों की सीख नेताओं को मार्गदर्शन देती है? Religion Impacts Politics Ancient Texts
साधनान्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, पं. विजयशंकर मेहता के कॉलम में धर्मग्रंथों के राजनीतिक जीवन पर प्रभाव पर प्रकाश डाला गया है।
लेखक ने तर्क दिया है कि गीता, रामायण, महाभारत, कुरान, और बाइबिल जैसे धर्मग्रंथों में निहित ज्ञान और संकेत, राजनीति में सफलता और स्थिरता के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकते हैं।
आज की राजनीतिक परिस्थितियों में अक्सर ऐसे निर्णय लिए जाते हैं जो चौंकाने वाले लगते हैं, लेकिन लेखक का मानना है कि इन निर्णयों की जड़ें अक्सर इतिहास और धार्मिक ग्रंथों में मिलती हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे प्रमुख राजनीतिक दलों के अतीत के नेताओं ने ऐसे ग्रंथों का अध्ययन किया और उनके विचारों को अपने राजनीतिक जीवन में उतारा।
लेखक का सुझाव है कि बीजेपी और कांग्रेस जैसे प्रमुख राजनीतिक दलों के नेता, चुनावों में सफलता प्राप्त करने और लंबे समय तक राजनीतिक सत्ता में बने रहने के लिए धर्मग्रंथों में दी गई सीख और संकेतों को समझें और उनको अपने जीवन में लागू करें।
भले ही प्रतिदिन एक पृष्ठ पढ़ने का समय निकालें, लेकिन ग्रंथों का अध्ययन निरंतर जारी रखना चाहिए।
यह राजनीति में नैतिकता और दूरदर्शिता लाने में सहायक होगा।
यह एक ऐसा दृष्टिकोण है जो राजनीति में नेताओं को धैर्य, बुद्धिमत्ता और न्याय के मार्ग पर चलने में मदद कर सकता है।
इस प्रकार, धर्मग्रंथों की शिक्षाएँ राजनीतिक नेताओं के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक हो सकती हैं।
- धर्मग्रंथों की सीख राजनीतिक निर्णयों को प्रभावित करती है।
- बीजेपी और कांग्रेस जैसे दलों को ग्रंथों से सीख लेनी चाहिए।
- नैतिक और दूरदर्शी नेतृत्व के लिए धर्मग्रंथों का अध्ययन आवश्यक है।
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Posted on 17 September 2025 | Stay updated with साधनान्यूज़.com for more news.
