पंडित विजयशंकर मेहता का राजनीतिक दर्शन: क्या मन ही चुनावों की कुंजी है? Spirituality Politics Intersecting Minds Body
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पंडित विजयशंकर मेहता का राजनीतिक दर्शन: क्या मन ही चुनावों की कुंजी है? Spirituality Politics Intersecting Minds Body
साधनान्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रख्यात चिंतक पंडित विजयशंकर मेहता के नवीनतम कॉलम में राजनीति और आध्यात्मिकता के बीच एक गहन संबंध स्थापित किया गया है।
मेहता जी ने अपने विचारों में शरीर और मन के बीच के अंतर्संबंध पर प्रकाश डाला है, यह तर्क देते हुए कि शरीर की भांति राजनीति भी मन की स्थिति पर निर्भर करती है।
उनके अनुसार, कम्पित मन वाला व्यक्ति, चाहे वह नेता हो या आम जन, अपने निर्णयों में असंगतता दिखाता है, जिससे राजनीतिक परिदृश्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
मेहता जी ने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे अस्थिर मन भोजन, धन, शक्ति, और प्रशंसा जैसे मामलों में असंतुलन पैदा करता है, ठीक वैसे ही जैसे चुनावों में कांग्रेस और बीजेपी जैसे दलों के नेता, अपने अहंकार या निराशा के कारण गलत फैसले लेते हैं।
अधिकार और शक्ति का अत्यधिक लालच राजनीतिक अस्थिरता और जनता के लिए खतरा बन सकता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीति में सफलता के लिए मन की स्थिरता आवश्यक है।
केवल शांत और संतुलित मन वाला नेता ही जनता के हितों को समझ सकता है और सही निर्णय ले सकता है।
इसलिए, चुनावों में मतदान करते समय भी हमें यह देखना चाहिए कि क्या प्रत्याशी का मन शांत और स्थिर है।
उनका यह विचार राजनीति के क्षेत्र में आध्यात्मिकता की भूमिका पर गंभीर विचार करने के लिए प्रेरित करता है।
इस कॉलम के माध्यम से पंडित विजयशंकर मेहता ने राजनीति में आध्यात्मिकता के महत्व को रेखांकित किया है।
- मन की स्थिरता राजनीतिक सफलता की कुंजी
- कांग्रेस और बीजेपी नेताओं के लिए महत्वपूर्ण सबक
- चुनावों में मतदान करते समय मन की स्थिरता पर ध्यान दें
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Posted on 14 September 2025 | Keep reading साधनान्यूज़.com for news updates.
