📅 11 अप्रैल 2026 | SadhnaNEWS Desk
🔑 मुख्य बातें
- खड़गे ने सरकार पर महिला आरक्षण बिल को जल्दबाजी में लाने का आरोप लगाया।
- लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने के प्रस्ताव पर कांग्रेस ने उठाए सवाल।
- सरकार पर विधानसभा चुनावों में लाभ लेने के लिए बिल लाने का आरोप लगाया गया है।
नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने महिला आरक्षण संशोधन बिल को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सरकार पर जल्दबाजी में बिल लाने और आचार संहिता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। खड़गे ने कहा कि सरकार इस बिल को आगामी विधानसभा चुनावों में राजनीतिक लाभ लेने के लिए ला रही है। उन्होंने लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने के प्रस्ताव पर भी सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में खड़गे ने कहा कि सरकार की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं मिला है। उन्हें इस बारे में जानकारी केवल प्रधानमंत्री के एक पत्र के माध्यम से मिली है। उन्होंने कहा कि सरकार लंबे समय तक चुप रहने के बाद अब अचानक इस मुद्दे पर सक्रियता दिखा रही है। सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है, जिसमें संविधान संशोधन बिल पेश करने की तैयारी है।
सरकार महिलाओं को 33% आरक्षण देने के साथ-साथ लोकसभा और विधानसभा सीटों में 50% तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव ला सकती है। इसके तहत लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर 816 हो जाएंगी। CWC की बैठक में महिला आरक्षण, परिसीमन और पश्चिम एशिया के हालात पर भी चर्चा हुई। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर कहा कि कांग्रेस महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट मीटिंग में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दी गई थी। इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा की सीटें मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 की जाएंगी, जिनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। सरकार परिसीमन कानून में संशोधन के लिए एक अलग बिल भी लाएगी, ताकि नए सिरे से सीटों का निर्धारण हो सके।
सरकार द्वारा लाए जाने वाले इस बिल के अनुसार, राज्यों की विधानसभाओं में भी इसी अनुपात में सीटों का आरक्षण होगा। नई सीटों का निर्धारण 2027 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर किया जा सकता है। यह कानून राज्यों की विधानसभाओं और दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं पर भी लागू होगा। इस बिल को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है।
विपक्ष सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बता रही है। अब देखना यह होगा कि संसद में इस बिल पर क्या रुख रहता है और क्या यह कानून का रूप ले पाता है। इस बिल का पारित होना भारत की राजनीति में एक बड़ा बदलाव ला सकता है, खासकर महिलाओं की भागीदारी के मामले में।
यह बिल न केवल महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त करेगा बल्कि देश के राजनीतिक परिदृश्य को भी बदल देगा। आने वाले समय में, इस बिल का प्रभाव भारत के राष्ट्रीय परिदृश्य पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। सरकार और विपक्ष दोनों ही इस बिल को लेकर अपनी-अपनी रणनीति बना रहे हैं, जिससे संसद में इस पर तीखी बहस होने की संभावना है।
🔍 खबर का विश्लेषण
यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव को दर्शाती है। यह दिखाता है कि सरकार इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से ले रही है और विपक्ष को इस पर कितनी आपत्तियां हैं। यह खबर आने वाले चुनावों के लिए राजनीतिक माहौल को भी गरमा सकती है। इस बिल के पारित होने या न होने से देश की राजनीति पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ महिला आरक्षण बिल क्या है?
महिला आरक्षण बिल महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव करता है। यह बिल महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से लाया गया है।
❓ खड़गे ने सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
खड़गे ने सरकार पर महिला आरक्षण बिल को जल्दबाजी में लाने और आचार संहिता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस बिल को आगामी विधानसभा चुनावों में राजनीतिक लाभ लेने के लिए ला रही है।
❓ लोकसभा सीटों की संख्या कितनी बढ़ाई जाएगी?
सरकार लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव कर रही है। इस वृद्धि का उद्देश्य जनसंख्या वृद्धि के साथ तालमेल बिठाना और अधिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है।
❓ परिसीमन कानून में संशोधन क्यों किया जा रहा है?
परिसीमन कानून में संशोधन इसलिए किया जा रहा है ताकि नई सीटों का निर्धारण किया जा सके। यह संशोधन 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा और इससे राज्यों की विधानसभाओं में भी सीटों का पुनर्वितरण होगा।
❓ इस बिल का भविष्य क्या है?
इस बिल का भविष्य अनिश्चित है। सरकार इसे पारित कराने के लिए प्रयासरत है, लेकिन विपक्ष इसका विरोध कर रहा है। संसद में इस बिल पर तीखी बहस होने की संभावना है और इसका परिणाम देश की राजनीति को प्रभावित करेगा।
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Source: Agency Inputs
| Published: 11 अप्रैल 2026
