📅 18 मार्च 2026 | SadhnaNEWS Desk
🔑 मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने गोद लेने वाली माताओं को 12 हफ्ते की छुट्टी का हक दिया, उम्र का नियम रद्द किया।
- कोर्ट ने केंद्र सरकार को पितृत्व अवकाश को कानून में शामिल करने का निर्देश दिया, जो एक स्वागत योग्य कदम है।
- यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का समर्थन करता है और भेदभाव को खत्म करता है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि बच्चा गोद लेने वाली माताओं को अब 12 सप्ताह की छुट्टी मिलेगी, चाहे बच्चे की उम्र कुछ भी हो। पहले यह नियम सिर्फ 3 महीने से कम उम्र के बच्चों को गोद लेने पर ही लागू था, जिसे कोर्ट ने भेदभावपूर्ण बताया है। जस्टिस जे बी परदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।
कोर्ट ने धारा 60(4) को असंवैधानिक करार देते हुए 3 महीने से कम उम्र के बच्चे के नियम को रद्द कर दिया। याचिकाकर्ता हमसानंदिनी नंदूरी ने तर्क दिया था कि उम्र के आधार पर छुट्टी देना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को सही मानते हुए यह फैसला दिया है, जिससे गोद लेने वाली माताओं को बड़ी राहत मिलेगी।
इसके अतिरिक्त, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को पितृत्व अवकाश (पिता की छुट्टी) को भी कानून में शामिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि पितृत्व अवकाश की अवधि माता-पिता और बच्चे की जरूरतों के अनुसार तय होनी चाहिए। यह फैसला पितृत्व अवकाश को कानूनी मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारत में अभी तक कानूनन मान्यता प्राप्त नहीं है।
भारत में मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) तो मिलता है, लेकिन पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) को लेकर कोई स्पष्ट कानून नहीं है। इस फैसले के बाद उम्मीद है कि सरकार इस दिशा में भी कदम उठाएगी और पिता को भी बच्चे की देखभाल के लिए छुट्टी मिल सकेगी। इससे परिवार में माता और पिता दोनों को बच्चे की परवरिश में समान रूप से शामिल होने का अवसर मिलेगा।
यह फैसला न केवल कानूनी रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक रूप से भी एक बड़ा संदेश देता है। यह दर्शाता है कि कानून लैंगिक समानता और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि बच्चे की उम्र के आधार पर छुट्टी में भेदभाव करना उचित नहीं है, क्योंकि हर बच्चे को समान देखभाल और प्यार की जरूरत होती है। यह फैसला देश में गोद लेने की प्रक्रिया को भी प्रोत्साहित करेगा, क्योंकि अब माता-पिता को बच्चे की उम्र को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं होगी। सरकार को अब इस फैसले को लागू करने के लिए उचित कदम उठाने होंगे, ताकि इसका लाभ सभी जरूरतमंद परिवारों तक पहुंच सके।
इस फैसले का असर पूरे देश पर पड़ेगा, खासकर उन परिवारों पर जो बच्चे गोद लेने की योजना बना रहे हैं। अब वे बिना किसी चिंता के बच्चे को गोद ले सकेंगे और उसे उचित देखभाल दे सकेंगे। यह फैसला भारत को एक प्रगतिशील और समावेशी राष्ट्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री और सरकार को इस फैसले का समर्थन करना चाहिए और इसे जल्द से जल्द लागू करने के लिए कदम उठाने चाहिए।
🔍 खबर का विश्लेषण
यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह गोद लेने वाले माता-पिता के अधिकारों को मजबूत करती है और लैंगिक समानता को बढ़ावा देती है। पितृत्व अवकाश पर कोर्ट का निर्देश भारत में परिवार नीतियों को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि अब पुरुषों को भी बच्चे की देखभाल में बराबर का मौका मिलेगा। यह फैसला सामाजिक न्याय और समानता के मूल्यों को स्थापित करने में मदद करेगा।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ बच्चा गोद लेने पर मां को कितने हफ्ते की छुट्टी मिलेगी?
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, बच्चा गोद लेने वाली मां को अब 12 हफ्ते की छुट्टी मिलेगी, चाहे बच्चे की उम्र कुछ भी हो। पहले यह नियम सिर्फ 3 महीने से कम उम्र के बच्चों के लिए था।
❓ क्या पिता को भी बच्चे की देखभाल के लिए छुट्टी मिलेगी?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को पितृत्व अवकाश को कानून में शामिल करने का निर्देश दिया है। इससे पिता को भी बच्चे की देखभाल के लिए छुट्टी मिल सकेगी, हालांकि इसकी अवधि सरकार द्वारा तय की जाएगी।
❓ सुप्रीम कोर्ट ने किस धारा को असंवैधानिक करार दिया?
सुप्रीम कोर्ट ने सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 की धारा 60(4) को असंवैधानिक करार दिया, जिसमें बच्चे की उम्र 3 महीने से कम होने पर ही छुट्टी देने का नियम था।
❓ इस फैसले का क्या महत्व है?
यह फैसला गोद लेने वाले माता-पिता के अधिकारों को मजबूत करता है और लैंगिक समानता को बढ़ावा देता है। पितृत्व अवकाश पर कोर्ट का निर्देश भारत में परिवार नीतियों को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
❓ यह फैसला किस अनुच्छेद का समर्थन करता है?
यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का समर्थन करता है और भेदभाव को खत्म करता है। हर बच्चे को समान देखभाल और प्यार की जरूरत होती है, इसलिए उम्र के आधार पर छुट्टी में भेदभाव करना उचित नहीं है।
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Source: Agency Inputs
| Published: 18 मार्च 2026
