📅 13 मार्च 2026 | SadhnaNEWS Desk
🔑 मुख्य बातें
- शशि थरूर ने मणि शंकर अय्यर के पत्र का जवाब दिया, जिसमें अय्यर ने थरूर की विदेश नीति की आलोचना की थी।
- थरूर ने कहा कि विदेश नीति पर मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन किसी की देशभक्ति पर सवाल उठाना गलत है।
- अय्यर ने थरूर पर अमेरिका-इजराइल और ईरान से जुड़े मुद्दों पर भारत के नैतिक रुख को कमजोर करने का आरोप लगाया था।
नई दिल्ली: कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं, शशि थरूर और मणि शंकर अय्यर, के बीच वाकयुद्ध और गहरा गया है। थरूर ने अय्यर द्वारा लिखे गए खुले पत्र का जवाब एक और खुले पत्र के माध्यम से दिया है। इस पत्र में थरूर ने स्पष्ट किया है कि विदेश नीति पर मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन इस आधार पर किसी की नीयत या देशभक्ति पर सवाल उठाना अनुचित है। यह विवाद अय्यर द्वारा 10 मार्च को लिखे गए एक पत्र के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने थरूर की विदेश नीति की आलोचना की थी।
अय्यर ने अपने पत्र में आरोप लगाया था कि थरूर ने अमेरिका-इजराइल और ईरान से जुड़े मुद्दों पर भारत के नैतिक रुख को कमजोर किया है। उनका मानना है कि भारत को शक्तिशाली देशों के दबाव में आकर चुप नहीं रहना चाहिए, बल्कि गांधी-नेहरू की नैतिक राजनीति से प्रेरणा लेनी चाहिए। अय्यर ने थरूर से यह भी पूछा कि क्या वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कृपा पाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें विपक्ष से वह लाभ नहीं मिल सकता जो मोदी दे सकते हैं।
थरूर ने अपने जवाब में कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया नहीं दी थी, लेकिन अब जवाब देना आवश्यक हो गया है। उन्होंने लिखा कि लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि लोगों को अलग-अलग राय रखने का अधिकार है, और असहमति होना गलत नहीं है। हालांकि, केवल इसलिए कि कोई विदेश नीति को थोड़ा अलग तरीके से देखता है, उसकी नीयत या देशभक्ति पर संदेह करना न्यायसंगत नहीं है। थरूर ने अय्यर की सार्वजनिक टिप्पणियों का जवाब देना जरूरी समझा, खासकर उनके विचारों और चरित्र के बारे में की गई टिप्पणियों के संदर्भ में।
थरूर ने जोर देकर कहा कि उन्होंने हमेशा अंतरराष्ट्रीय मामलों को भारत के राष्ट्रीय हित के नजरिए से देखा है। उनके लिए भारत की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और दुनिया में भारत की प्रतिष्ठा सबसे महत्वपूर्ण है। थरूर का मानना है कि दुनिया की राजनीतिक वास्तविकता को समझना और भारत के हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लेना कोई ‘नैतिक समर्पण’ नहीं है, बल्कि यह एक जिम्मेदार राष्ट्र का कर्तव्य है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा सिद्धांतों और व्यावहारिकता के बीच संतुलन बनाए रखने पर आधारित रही है।
जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्ष नीति से लेकर आज की बहु-संरेखण कूटनीति तक, भारत का उद्देश्य हमेशा अपनी संप्रभुता की रक्षा करना और दुनिया में न्याय की वकालत करना रहा है। थरूर ने कहा कि संसद में हों या संसद के बाहर, उनका रिकॉर्ड हमेशा इसी संतुलन को दर्शाता है। यह विवाद कांग्रेस के भीतर विदेश नीति को लेकर जारी बहस को उजागर करता है और दिखाता है कि पार्टी के भीतर अलग-अलग विचारधाराएं मौजूद हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब देश में राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है और विभिन्न मुद्दों पर तीखी बहस चल रही है। थरूर और अय्यर, दोनों ही कांग्रेस के दिग्गज नेता हैं और उनके बीच इस तरह का सार्वजनिक विवाद पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। अब देखना यह है कि इस विवाद का आगे क्या रुख होता है और पार्टी इस स्थिति को कैसे संभालती है।
इस पूरे मामले से यह भी स्पष्ट होता है कि विदेश नीति के मुद्दों पर राजनीतिक दलों के भीतर भी अलग-अलग राय हो सकती हैं और इन पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। हालांकि, यह भी जरूरी है कि इस तरह की चर्चाओं में व्यक्तिगत आक्षेपों से बचा जाए और राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखा जाए।
🔍 खबर का विश्लेषण
यह घटनाक्रम कांग्रेस पार्टी के भीतर विदेश नीति को लेकर मौजूद विभिन्न दृष्टिकोणों को दर्शाता है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि पार्टी के भीतर अलग-अलग विचारधाराएं हैं और विदेश नीति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अलग-अलग राय हो सकती है। इस विवाद से पार्टी के भीतर संवाद और बहस की आवश्यकता भी उजागर होती है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ शशि थरूर और मणि शंकर अय्यर के बीच विवाद का क्या कारण है?
विवाद का मुख्य कारण मणि शंकर अय्यर द्वारा शशि थरूर की विदेश नीति की आलोचना करना है। अय्यर ने थरूर पर भारत के नैतिक रुख को कमजोर करने का आरोप लगाया था।
❓ मणि शंकर अय्यर ने शशि थरूर पर क्या आरोप लगाए थे?
अय्यर ने थरूर पर अमेरिका-इजराइल और ईरान से जुड़े मुद्दों पर भारत के नैतिक रुख को कमजोर करने का आरोप लगाया था। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या थरूर मोदी की कृपा पाने की कोशिश कर रहे हैं।
❓ शशि थरूर ने मणि शंकर अय्यर के आरोपों का क्या जवाब दिया?
थरूर ने जवाब में कहा कि विदेश नीति पर मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन किसी की देशभक्ति पर सवाल उठाना गलत है। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा भारत के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर फैसले लिए हैं।
❓ इस विवाद का कांग्रेस पार्टी पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
इस विवाद से कांग्रेस पार्टी के भीतर विदेश नीति को लेकर बहस तेज हो सकती है। यह पार्टी के भीतर अलग-अलग विचारधाराओं को भी उजागर करता है, जिससे पार्टी में कुछ तनाव पैदा हो सकता है।
❓ इस घटनाक्रम का भारत की विदेश नीति पर क्या असर पड़ेगा?
इस घटनाक्रम का भारत की विदेश नीति पर सीधा असर पड़ने की संभावना कम है। हालांकि, यह विदेश नीति के मुद्दों पर राजनीतिक दलों के भीतर अलग-अलग राय को दर्शाता है।
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Source: Agency Inputs
| Published: 13 मार्च 2026
