📅 06 मार्च 2026 | SadhnaNEWS Desk
🔑 मुख्य बातें
- फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च 2026 को, चंद्र ग्रहण के कारण 3 मार्च को धार्मिक कार्य नहीं होंगे।
- शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा का व्रत उसी दिन रखें जब सूर्यास्त के बाद चंद्रमा उदय हो रहा हो।
- होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों वाली होली 4 मार्च 2026 को मनाई जाएगी।
नई दिल्ली: फाल्गुन पूर्णिमा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इसके अगले दिन होली का रंगारंग उत्सव मनाया जाता है। वर्ष 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि को लेकर कुछ भ्रम की स्थिति है, क्योंकि इस दिन चंद्र ग्रहण भी लग रहा है। ऐसे में सही तिथि और व्रत के महत्व को जानना आवश्यक है।
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को शाम 05:56 बजे शुरू होगी और 3 मार्च 2026 को शाम 05:08 बजे समाप्त होगी। शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा का व्रत उसी दिन रखना चाहिए जब सूर्यास्त के बाद पूर्णिमा तिथि में चंद्रमा दिखाई दे। चूंकि 3 मार्च को पूर्णिमा तिथि चंद्रमा निकलने से पहले ही समाप्त हो रही है, इसलिए 2 मार्च को व्रत रखना शास्त्रसम्मत माना गया है। इस दिन चंद्र दर्शन करना भी शुभ फलदायी होगा।
3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण लगने के कारण सूतक काल भी मान्य होगा। सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और किसी भी प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान वर्जित होते हैं। इसलिए विद्वानों ने 3 मार्च के बजाय 2 मार्च को ही धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करने की सलाह दी है। इस खगोलीय घटना का प्रभाव देश और दुनिया पर पड़ेगा, इसलिए सावधानी बरतनी चाहिए।
होलिका दहन 2 मार्च की रात को किया जाएगा, क्योंकि पूर्णिमा तिथि इसी दिन शुरू हो रही है। रंगों वाली होली, जिसे धुलेंडी भी कहा जाता है, 4 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। यह त्योहार भाईचारे और प्रेम का प्रतीक है, जिसमें लोग एक दूसरे को रंग लगाते हैं और खुशियां मनाते हैं। सरकार ने भी इस त्योहार को शांतिपूर्वक मनाने की अपील की है।
इस वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा और होली के त्योहारों को चंद्र ग्रहण के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए मनाना होगा। 2 मार्च को व्रत और होलिका दहन करना शुभ रहेगा, जबकि 4 मार्च को रंगों वाली होली मनाई जाएगी। यह त्योहार राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता का संदेश देता है। प्रधानमंत्री ने भी देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं।
फाल्गुन पूर्णिमा का व्रत रखने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह व्रत सुख, समृद्धि और शांति प्रदान करता है। इस दिन दान-पुण्य करने का भी विशेष महत्व है। गरीबों और जरूरतमंदों को दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
अंत में, फाल्गुन पूर्णिमा 2026 एक विशेष अवसर है, जिसमें हमें धार्मिक मान्यताओं और खगोलीय घटनाओं का ध्यान रखते हुए त्योहार मनाना है। 2 मार्च को व्रत और होलिका दहन करें, और 4 मार्च को रंगों वाली होली मनाएं। यह त्योहार आपके जीवन में खुशियां और समृद्धि लाए, यही हमारी कामना है।
🔍 खबर का विश्लेषण
यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह फाल्गुन पूर्णिमा और होली के त्योहारों की सही तिथियों के बारे में जानकारी प्रदान करती है। चंद्र ग्रहण के कारण तिथियों में बदलाव हुआ है, जिससे लोगों में भ्रम की स्थिति है। यह लेख सही जानकारी देकर लोगों को धार्मिक अनुष्ठानों को सही तरीके से मनाने में मदद करता है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ फाल्गुन पूर्णिमा 2026 कब है?
फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च 2026 को है। इस दिन व्रत रखना शुभ माना गया है, क्योंकि इसी दिन सूर्यास्त के बाद पूर्णिमा तिथि में चंद्रमा का उदय होगा।
❓ वर्ष 2026 में होलिका दहन कब किया जाएगा?
होलिका दहन 2 मार्च 2026 को किया जाएगा, क्योंकि पूर्णिमा तिथि इसी दिन शुरू हो रही है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
❓ रंगों वाली होली (धुलेंडी) 2026 में कब मनाई जाएगी?
रंगों वाली होली, जिसे धुलेंडी भी कहा जाता है, 4 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। यह त्योहार भाईचारे और प्रेम का प्रतीक है।
❓ 3 मार्च 2026 को धार्मिक कार्य क्यों वर्जित हैं?
3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण लगने के कारण सूतक काल मान्य होगा। सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और धार्मिक अनुष्ठान वर्जित होते हैं।
❓ फाल्गुन पूर्णिमा व्रत का क्या महत्व है?
फाल्गुन पूर्णिमा का व्रत रखने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह व्रत सुख, समृद्धि और शांति प्रदान करता है। इस दिन दान-पुण्य करने का भी विशेष महत्व है।
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Source: Agency Inputs
| Published: 06 मार्च 2026
