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    असम: हयग्रीव मंदिर में कछुए चढ़ाने की अनोखी परंपरा, मनोकामनाएं होती हैं पूरी

    धर्म
    📅 01 मार्च 2026 | SadhnaNEWS Desk

    असम: हयग्रीव मंदिर में कछुए चढ़ाने की अनोखी परंपरा, मनोकामनाएं होती हैं पूरी - SadhnaNEWS Hindi News


    🔑 मुख्य बातें

    • असम के हाजों में स्थित हयग्रीव माधव मंदिर भगवान विष्णु के ‘हयग्रीव’ अवतार को समर्पित है।
    • मंदिर में भक्त अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए भगवान विष्णु को कछुए चढ़ाते हैं।
    • यह मंदिर हिंदू और बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है।

    असम के कामरूप जिले के हाजों में स्थित श्री हयग्रीव माधव मंदिर, भगवान विष्णु के ‘हयग्रीव’ अवतार को समर्पित है। यह मंदिर न केवल अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अपनी अनूठी परंपरा के लिए भी जाना जाता है। मणिकूट पर्वत पर स्थित यह मंदिर हिंदू और बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए सदियों से आस्था का केंद्र रहा है।

    इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां भक्त भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए कछुए चढ़ाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थान पर भगवान विष्णु ने ‘हयग्रीव’ रूप में मधु और कैटभ नामक राक्षसों का वध किया था। वर्तमान मंदिर का निर्माण 1583 में कोच राजा रघुदेव नारायण द्वारा कराया गया था, हालांकि कुछ लोग मानते हैं कि यह एक प्राचीन मंदिर का पुनर्निर्माण है।

    श्री हयग्रीव माधव मंदिर पत्थरों से बना है और इसकी दीवारों पर हाथियों और अन्य पौराणिक आकृतियों की सुंदर नक्काशी की गई है। मंदिर परिसर में स्थित ‘माधव पुखुरी’ नामक तालाब में सैकड़ों दुर्लभ प्रजाति के कछुए पाए जाते हैं। भक्त अपनी इच्छा पूरी होने पर या भगवान को श्रद्धा अर्पित करने के लिए इन कछुओं को भोजन कराते हैं या तालाब में छोड़ते हैं। स्थानीय लोग इन कछुओं को भगवान का रूप मानते हैं और उनकी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखते हैं।

    यह मंदिर हिंदू धर्म के साथ-साथ बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। बड़ी संख्या में तिब्बती बौद्ध भी यहां दर्शन के लिए आते हैं। हयग्रीव माधव मंदिर सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक है, जहां विभिन्न धर्मों के लोग एक साथ आकर प्रार्थना करते हैं। यह मंदिर असम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और हर साल हजारों पर्यटकों को आकर्षित करता है।

    मंदिर में नियमित रूप से पूजा और अनुष्ठान किए जाते हैं। विशेष अवसरों पर, जैसे कि विष्णु जयंती और हयग्रीव जयंती, यहां विशेष आयोजन होते हैं जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। मंदिर का प्रबंधन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है, जो मंदिर की देखभाल और व्यवस्था सुनिश्चित करता है।

    श्री हयग्रीव माधव मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विरासत का भी संगम है। यह स्थान उन लोगों के लिए एक शांत और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है जो भगवान विष्णु के दर्शन करने और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आते हैं। यह मंदिर असम के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक है, जो अपनी अनूठी परंपराओं और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है।

    🔍 खबर का विश्लेषण

    यह खबर हयग्रीव माधव मंदिर की अनूठी परंपरा और धार्मिक महत्व को उजागर करती है। यह मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह सांप्रदायिक सद्भाव और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। यह खबर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो धर्म, संस्कृति और पर्यटन में रुचि रखते हैं। यह असम के पर्यटन को बढ़ावा देने में भी मदद कर सकती है।

    ❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

    ❓ हयग्रीव माधव मंदिर कहाँ स्थित है?

    यह मंदिर असम राज्य के कामरूप जिले के हाजों में मणिकूट पर्वत पर स्थित है।

    ❓ हयग्रीव माधव मंदिर किस भगवान को समर्पित है?

    यह मंदिर भगवान विष्णु के ‘हयग्रीव’ अवतार को समर्पित है, जिन्हें घोड़े के सिर वाले अवतार के रूप में पूजा जाता है।

    ❓ इस मंदिर की प्रमुख विशेषता क्या है?

    इस मंदिर की प्रमुख विशेषता यह है कि यहां भक्त अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए भगवान विष्णु को कछुए चढ़ाते हैं।

    ❓ माधव पुखुरी क्या है?

    माधव पुखुरी मंदिर परिसर में स्थित एक तालाब है, जिसमें सैकड़ों दुर्लभ प्रजाति के कछुए पाए जाते हैं। भक्त इन कछुओं को भोजन कराते हैं या तालाब में छोड़ते हैं।

    ❓ हयग्रीव माधव मंदिर का निर्माण कब हुआ था?

    वर्तमान मंदिर का निर्माण 1583 में कोच राजा रघुदेव नारायण द्वारा कराया गया था।

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    Source: Agency Inputs
     |  Published: 01 मार्च 2026

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