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    महाशिवरात्रि विशेष: शिव पूजन में तुलसी और केतकी क्यों हैं वर्जित? जानें महादेव क… Mahashivratri Tulsi Ketaki Forbidden

    Pilgrimage news: Spiritual update: आज देश भर में आस्था और भक्ति का महापर्व महाशिवरात्रि धूमधाम से मनाया जा रहा है। शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है, जो अपने आराध्य को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजन कर रहे हैं। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा में कई प्रकार के फूल, फल और पत्तियां अर्पित की जाती हैं। हालाँकि, कुछ ऐसी भी चीजें हैं जिन्हें शिव पूजन में वर्जित माना गया है। आइए, जानते हैं इन विशेष वर्जित सामग्रियों और उनके पीछे की पौराणिक कथाओं के बारे में।

    प्रत्येक वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाता है। यह दिन भगवान शिव और देवी पार्वती के विवाह का प्रतीक है। इस विशेष अवसर पर भक्तगण शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग आदि चढ़ाकर महादेव की कृपा प्राप्त करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिव पूजन में अर्पित की जाने वाली हर सामग्री का अपना एक विशिष्ट महत्व होता है, लेकिन कुछ ऐसी भी सामग्रियां हैं, जिन्हें शिवजी को अर्पित नहीं करना चाहिए।

    **तुलसी क्यों नहीं चढ़ाते शिव जी को?**
    शिव पूजा में तुलसी का पत्ता न चढ़ाने के पीछे एक प्राचीन कथा प्रचलित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, तुलसी पूर्व जन्म में वृंदा नाम की एक स्त्री थीं, जो असुर जालंधर की पत्नी थीं। वृंदा भगवान विष्णु की परम भक्त और सती थीं, जिसकी वजह से जालंधर को कोई देवता पराजित नहीं कर पा रहा था। भगवान शिव और अन्य देवताओं ने भगवान विष्णु से जालंधर का वध करने का उपाय पूछा। तब भगवान विष्णु ने जालंधर का रूप धारण कर वृंदा के सतीत्व को भंग कर दिया। जब वृंदा को यह सत्य पता चला, तो उन्होंने क्रोधित होकर भगवान विष्णु को शाप दिया। इसके बाद वृंदा ने खुद को अग्नि में समर्पित कर दिया, और उनकी राख से तुलसी का पौधा उत्पन्न हुआ। भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि वे उनकी प्रिया बनेंगी। चूँकि वृंदा के सतीत्व का भंग भगवान शिव के जालंधर को पराजित करने के लिए किया गया था, इसलिए तुलसी को शिव पूजन में वर्जित माना जाता है। एक अन्य मत के अनुसार, भगवान शिव ने जालंधर का वध किया था, और चूंकि तुलसी उनके पति की पत्नी थीं, इसलिए उन्हें शिव पर नहीं चढ़ाया जाता।

    **केतकी का फूल क्यों है वर्जित?**
    इसी तरह, भगवान शिव को केतकी का फूल भी नहीं चढ़ाया जाता है। इसके पीछे की कथा अत्यंत रोचक है। एक बार ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु के बीच अपनी श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो गया। तब एक विशालकाय लिंग प्रकट हुआ और आकाशवाणी हुई कि जो भी इस लिंग के आदि और अंत का पता लगाएगा, वही श्रेष्ठ कहलाएगा। ब्रह्मा जी ऊपर की ओर गए और विष्णु जी नीचे की ओर। ब्रह्मा जी को रास्ते में केतकी का फूल मिला, जिसने झूठी गवाही दी कि ब्रह्मा जी ने लिंग का ऊपरी सिरा देख लिया है। जब भगवान शिव प्रकट हुए और उन्हें इस झूठ का पता चला, तो वे अत्यंत क्रोधित हुए। उन्होंने केतकी के फूल को शाप दिया कि वह कभी भी उनकी पूजा में इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। यही कारण है कि शिव पूजन में केतकी का फूल वर्जित माना जाता है।

    **शिव जी को कौन-कौन सी पत्तियां और फूल चढ़ा सकते हैं?**
    इसके विपरीत, भगवान शिव को कुछ विशिष्ट पत्तियां और फूल अत्यंत प्रिय हैं, जिन्हें अर्पित करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं। इनमें बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, भांग, शमी पत्र, कनेर के फूल और मंदार के फूल प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त, उन्हें जल, दूध, चंदन, भस्म और शहद भी प्रिय हैं। मान्यता है कि इन सामग्रियों को श्रद्धापूर्वक चढ़ाने से भगवान शिव अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं और उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

    भगवान शिव की पूजा में इन नियमों और मान्यताओं का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। सही विधि से पूजन करने से ही महादेव की कृपा प्राप्त होती है। महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर, सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करके आप भी भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। Follow साधनान्यूज़.com for the latest updates.

    • महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजन सामग्री का उपयोग किया जाता है।
    • तुलसी को शिव पूजा में वर्जित माना गया है, इसकी वजह असुर जालंधर और वृंदा की पौराणिक कथा है।
    • केतकी का फूल भी शिव जी को नहीं चढ़ाया जाता, ब्रह्मा जी के झूठ में साथ देने के कारण शिव ने इसे शाप दिया था।
    • बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और भांग भगवान शिव को अत्यंत प्रिय हैं और उन्हें अर्पित किए जाते हैं।
    • इन नियमों का पालन कर भक्त महादेव का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

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    स्रोत: Dainik Bhaskar

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