Headlines

अंतर्राष्ट्रीय सुर्खियों में: AI पर ‘विश्वास का अंतर’ उजागर, ऋषि सुनक बोले – नीत… Ai Trust Gap International Spotlight

Global update: International spotlight: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आज दुनिया के हर कोने में चर्चा का विषय बनी हुई है, लेकिन इसको लेकर लोगों के मन में आशा और आशंकाओं के अलग-अलग भाव हैं। इसी ‘विश्वास के अंतर’ को पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने हाल ही में रेखांकित किया है, जहाँ उन्होंने नीतिगत समाधानों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया है।

बुधवार को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में बोलते हुए, सुनक ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि जहाँ एक ओर भारत जैसे विकासशील राष्ट्र AI की अपार संभावनाओं को लेकर उत्साह और भरोसे से भरे हैं, वहीं दूसरी ओर पश्चिमी देशों में इस नई तकनीक के भविष्य को लेकर चिंताएँ हावी हैं। उन्होंने कहा कि यह दुनिया भर के नेताओं के लिए एक बड़ी चुनौती है कि वे इस भरोसे की खाई को पाटें और आम जनता में AI के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करें।

दिल्ली में आयोजित ‘एआई के दौर में राज करना: सॉवरेनिटी, असर और स्ट्रैटेजी’ नामक उच्च-स्तरीय कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान, सुनक ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक नेताओं के समक्ष जनता के विश्वास में इस विषमता को संबोधित करना एक प्रमुख चुनौती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस भरोसे के अंतर को मिटाने के लिए सिर्फ़ तकनीकी नवाचार पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि इसके लिए सोची-समझी नीतिगत पहलों की गहरी आवश्यकता है।

**प्रमुख बिंदु:**
* पूर्व यूके पीएम ऋषि सुनक ने AI पर वैश्विक ‘विश्वास के अंतर’ को उजागर किया।
* भारत जैसे विकासशील देशों में AI के प्रति आशावाद, जबकि पश्चिमी देशों में चिंताएं अधिक।
* सुनक ने कहा, जनता का भरोसा जीतने के लिए केवल तकनीकी प्रगति पर्याप्त नहीं, नीतिगत हस्तक्षेप आवश्यक।
* ‘एआई के दौर में राज करना: सॉवरेनिटी, असर और स्ट्रैटेजी’ नामक दिल्ली इवेंट में की गई यह टिप्पणी।
* चल रहे AI इम्पैक्ट समिट 2026 में 110 से अधिक देश और 30 अंतर्राष्ट्रीय संगठन हिस्सा ले रहे हैं।
* समिट का लक्ष्य AI की क्षमता को भारत के ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के साथ जोड़ना है।

अपनी बातचीत में, जो मेटा के एलेक्जेंडर वांग के साथ एक फायरसाइड चैट के दौरान सामने आई, सुनक ने कहा, ‘मेरा मानना है कि इस भरोसे की कमी को दूर करना जितना तकनीकी काम है, उतना ही यह नीति निर्माण का भी कार्य है।’ उन्होंने स्पष्ट रूप से संकेत दिया कि सरकारों को इस उभरती हुई तकनीक को लेकर जनता की आशंकाओं को दूर करने और इसके लाभों को सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

यह महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन, जो 20 फरवरी तक जारी रहेगा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर वैश्विक संवाद को गति देने के उद्देश्य से दुनिया भर के सरकारी नीति निर्माताओं, उद्योग AI विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, प्रौद्योगिकी नवप्रवर्तकों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाया है। ग्लोबल साउथ में आयोजित होने वाले पहले वैश्विक AI शिखर सम्मेलन के रूप में, इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य AI की परिवर्तनकारी क्षमता पर विचार करना है, जो भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ (सभी के कल्याण, सभी की खुशी) और मानवता के लिए AI के वैश्विक सिद्धांत के साथ पूर्ण सामंजस्य बिठाता है।

इस ऐतिहासिक समिट में 110 से अधिक देश और 30 अंतर्राष्ट्रीय संगठन भाग ले रहे हैं, जिनमें लगभग 20 देशों या सरकारों के प्रमुख और लगभग 45 मंत्री स्तर के प्रतिनिधि शामिल हैं। यह वैश्विक भागीदारी AI के भविष्य को आकार देने में एक सामूहिक दृष्टिकोण की आवश्यकता को दर्शाती है।

AI के वैश्विक प्रभावों और नीतिगत चुनौतियों पर ऐसी ही गहन जानकारी और नवीनतम अपडेट्स के लिए, साधनान्यूज़.com पर बने रहें।

  • पूर्व यूके पीएम ऋषि सुनक ने AI पर वैश्विक ‘विश्वास के अंतर’ को उजागर किया।
  • भारत जैसे विकासशील देशों में AI के प्रति आशावाद, जबकि पश्चिमी देशों में चिंताएं अधिक।
  • सुनक ने कहा, जनता का भरोसा जीतने के लिए केवल तकनीकी प्रगति पर्याप्त नहीं, नीतिगत हस्तक्षेप आवश्यक।
  • ‘एआई के दौर में राज करना: सॉवरेनिटी, असर और स्ट्रैटेजी’ नामक दिल्ली इवेंट में की गई यह टिप्पणी।
  • चल रहे AI इम्पैक्ट समिट 2026 में 110 से अधिक देश और 30 अंतर्राष्ट्रीय संगठन हिस्सा ले रहे हैं।
  • समिट का लक्ष्य AI की क्षमता को भारत के ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के साथ जोड़ना है।

Visit साधनान्यूज़.com for more stories.

स्रोत: Prabhasakshi

अधिक पढ़ने के लिए: Education Updates

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *