भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों पर रूस की प्रतिक्रिया: लावरोव ने कहा, ‘सस्ते रूसी… Russia Concerned India Us Trade
Global update: Global update: भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापारिक संबंधों के बीच, रूस ने अपनी चिंता व्यक्त की है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने स्पष्ट शब्दों में अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह भारत समेत कई देशों को रियायती दरों पर मिल रहे रूसी तेल की खरीद से रोकने का प्रयास कर रहा है। यह भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद रूस की ओर से आई पहली महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया है।
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने हाल ही में एक टेलीविजन साक्षात्कार के दौरान वाशिंगटन की नीतियों की कड़ी आलोचना की, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार में नए समीकरण गढ़ रही है। लावरोव ने दावा किया कि अमेरिका प्रतिबंधों, शुल्कों और अन्य प्रकार के निषेधात्मक कदमों के माध्यम से देशों पर दबाव बना रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य उन्हें रूसी ऊर्जा स्रोतों से दूर करना और महंगी अमेरिकी आपूर्तियों की ओर धकेलना है। लावरोव ने इस स्थिति को केवल व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि “दबाव की राजनीति” करार दिया, जिसका अंतिम लक्ष्य वैश्विक आर्थिक प्रभुत्व स्थापित करना है।
यूक्रेन संकट पर हुई चर्चाओं का उल्लेख करते हुए लावरोव ने कहा कि रूस ने पूर्व में अमेरिकी प्रस्तावों को सराहा था और विस्तृत सहयोग की संभावनाएँ तलाशी थीं। हालाँकि, वर्तमान परिस्थितियाँ अपेक्षाओं से भिन्न दिशा में बढ़ती दिख रही हैं। उन्होंने नए प्रतिबंधों के लागू होने और खुले समुद्र में टैंकरों के खिलाफ ऐसी कार्रवाइयों की निंदा की, जो समुद्री कानून की मूल भावना के विरुद्ध हैं।
* भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद रूस की यह पहली वरिष्ठ-स्तरीय आधिकारिक प्रतिक्रिया है।
* रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका पर भारत सहित अन्य देशों को सस्ते रूसी तेल से रोकने का आरोप लगाया।
* अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों, शुल्कों और अन्य दबावपूर्ण नीतियों का उपयोग करने का दावा किया गया।
* लावरोव के अनुसार, यह कदम वैश्विक आर्थिक वर्चस्व स्थापित करने के लिए ‘दबाव की राजनीति’ का हिस्सा है।
* रूस, भारत और चीन जैसे देशों सहित सभी के साथ सहयोग के लिए तैयार है, लेकिन अमेरिकी नीतियां कृत्रिम बाधाएं खड़ी कर रही हैं।
* भारत ने अपनी ऊर्जा नीति को राष्ट्रीय हितों द्वारा निर्देशित बताया, जिसमें पर्याप्त उपलब्धता, उचित मूल्य और विश्वसनीय आपूर्ति प्राथमिकता पर हैं।
रूसी मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यूरोप को पहले ही रूसी ऊर्जा से दूर किया जा चुका है, और अब भारत तथा अन्य साझेदार देशों को भी रियायती आपूर्ति से काटने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका चाहता है कि देश महंगी अमेरिकी एलएनजी और अन्य ऊर्जा स्रोत खरीदें, भले ही यह उनके आर्थिक हितों के विपरीत क्यों न हो। लावरोव ने यह भी स्पष्ट किया कि रूस भारत, चीन, इंडोनेशिया और ब्राजील जैसे देशों के साथ-साथ अमेरिका सहित सभी के साथ सहयोग के लिए खुला है, लेकिन अमेरिकी नीतियां स्वयं मार्ग में कृत्रिम अवरोध पैदा कर रही हैं।
इस बीच, भारत ने रूसी तेल पर अपनी स्थिति को एक बार फिर दोहराया है। भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसकी ऊर्जा नीति पूरी तरह से राष्ट्रीय हितों से संचालित होगी। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि भारत की प्राथमिकता पर्याप्त उपलब्धता, उचित कीमत और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करना है। भारत ने यह भी साफ किया कि वह बाजार की स्थिति और अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए अपने ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण करेगा।
यह सारी अटकलें तब तेज हुई थीं जब अमेरिका ने भारत पर लगाए गए अतिरिक्त शुल्कों को हटाने का फैसला किया। इस कदम के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि क्या भारत रूसी कच्चे तेल की खरीद में कमी लाएगा, और इसी पृष्ठभूमि में रूस का यह बयान सामने आया है।
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- भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद रूस की यह पहली वरिष्ठ-स्तरीय आधिकारिक प्रतिक्रिया है।
- रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका पर भारत सहित अन्य देशों को सस्ते रूसी तेल से रोकने का आरोप लगाया।
- अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों, शुल्कों और अन्य दबावपूर्ण नीतियों का उपयोग करने का दावा किया गया।
- लावरोव के अनुसार, यह कदम वैश्विक आर्थिक वर्चस्व स्थापित करने के लिए ‘दबाव की राजनीति’ का हिस्सा है।
- रूस, भारत और चीन जैसे देशों सहित सभी के साथ सहयोग के लिए तैयार है, लेकिन अमेरिकी नीतियां कृत्रिम बाधाएं खड़ी कर रही हैं।
- भारत ने अपनी ऊर्जा नीति को राष्ट्रीय हितों द्वारा निर्देशित बताया, जिसमें पर्याप्त उपलब्धता, उचित मूल्य और विश्वसनीय आपूर्ति प्राथमिकता पर हैं।
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स्रोत: Prabhasakshi
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