न्यू स्टार्ट संधि का पटाक्षेप: डोनाल्ड ट्रंप की नई परमाणु डील की वकालत, वैश्विक … Trump Urges New Nuclear Deal
Global update: वैश्विक अपडेट: पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे समय में नवीन और उन्नत परमाणु समझौते की आवश्यकता पर बल दिया है, जब संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों पर नियंत्रण के लिए अंतिम प्रमुख संधि, न्यू स्टार्ट, अपनी अवधि पूरी कर चुकी है। ट्रंप की इस टिप्पणी ने विश्व स्तर पर हथियारों की एक नई होड़ शुरू होने की आशंकाओं को फिर से हवा दे दी है, जिस पर व्यापक चर्चा छिड़ गई है।
यह उल्लेखनीय है कि न्यू स्टार्ट संधि पर वर्ष 2010 में हस्ताक्षर किए गए थे। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों, अमेरिका और रूस, द्वारा रखे गए परमाणु हथियारों की संख्या को सीमित करना था। इस महत्वपूर्ण समझौते को तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में लागू किया गया और बाद में जो बाइडन प्रशासन ने भी इसकी समय-सीमा बढ़ाई।
हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को “ठीक ढंग से न बना” समझौता करार दिया है और आरोप लगाया है कि इसका बड़े पैमाने पर उल्लंघन किया गया है। उनके अनुसार, यह संधि अमेरिका के हितों की पर्याप्त रक्षा नहीं करती थी। ट्रंप प्रशासन काफी समय से यह मांग करता रहा है कि किसी भी भविष्य के परमाणु समझौते में चीन को भी शामिल किया जाए। उनका मानना है कि चीन की बढ़ती सैन्य शक्ति को देखते हुए उसे भी ऐसे समझौतों के दायरे में लाना आवश्यक है।
हालांकि, चीन ने इस दबाव को सार्वजनिक रूप से नकार दिया है। चीन के विदेश मंत्रालय का स्पष्ट कहना है कि उसके परमाणु हथियार अमेरिका और रूस के विशाल भंडारों के स्तर के नहीं हैं, और इसलिए मौजूदा परिस्थितियों में वह किसी भी परमाणु निरस्त्रीकरण वार्ता में शामिल नहीं होगा।
इस बीच, व्हाइट हाउस ने भी स्पष्ट कर दिया है कि न्यू स्टार्ट संधि की अवधि समाप्त होने के बाद अमेरिका और रूस के बीच इसकी शर्तों को अस्थायी रूप से भी मानने पर कोई आपसी सहमति नहीं बन पाई है। रूस पहले ही इस संधि के तहत होने वाली निरीक्षण प्रक्रियाओं से पीछे हट चुका था और अब उसने यह भी घोषणा कर दी है कि वह परमाणु हथियारों की संख्या पर किसी भी सीमा को बाध्यकारी नहीं मानता।
परमाणु नियंत्रण को लेकर यह गंभीर गतिरोध बना हुआ है, इसके बावजूद डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के साथ कूटनीतिक संवाद फिर से शुरू करने का प्रयास किया है। पिछले साल, उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अलास्का आने का निमंत्रण भी दिया था, जो दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की दिशा में एक कदम था। हाल ही में, यूक्रेन युद्ध के बावजूद, अमेरिका ने अबू धाबी में हुई बातचीत के बाद रूस के साथ सैन्य संवाद फिर से शुरू करने की घोषणा की है, जिससे कुछ पर्यवेक्षकों को उम्मीद की किरण दिख रही है।
परमाणु हथियार नियंत्रण से जुड़े विशेषज्ञ और विभिन्न संगठन लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि न्यू स्टार्ट संधि के खत्म होने से वैश्विक परमाणु स्थिरता कमजोर होगी और हथियारों की होड़ का खतरा बढ़ जाएगा। कई पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों ने अमेरिका और रूस दोनों से आग्रह किया है कि जब तक कोई नया और व्यापक समझौता नहीं हो जाता, तब तक वे पुरानी सीमाओं का स्वेच्छा से पालन करते रहें। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने भी वैश्विक निरस्त्रीकरण प्रयासों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है, ताकि मानवता विनाशकारी संघर्षों से बची रहे।
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- पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक नए, आधुनिक परमाणु समझौते की आवश्यकता पर बल दिया है।
- अमेरिका और रूस के बीच अंतिम परमाणु हथियार नियंत्रण संधि ‘न्यू स्टार्ट’ की अवधि समाप्त हो गई है।
- ट्रंप ने न्यू स्टार्ट को “खराब तरीके से तय किया गया” समझौता बताकर इसके उल्लंघन का आरोप लगाया।
- अमेरिका नए समझौते में चीन को शामिल करना चाहता है, जिसे चीन ने यह कहकर खारिज कर दिया कि उसके हथियार अमेरिका-रूस के स्तर के नहीं हैं।
- रूस ने न्यू स्टार्ट की शर्तों को बाध्यकारी मानने से इनकार किया और पहले ही निरीक्षण प्रक्रिया से हट चुका है।
- परमाणु नियंत्रण विशेषज्ञों ने न्यू स्टार्ट के अंत से वैश्विक परमाणु स्थिरता कमजोर होने और हथियारों की दौड़ बढ़ने की चेतावनी दी है।
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स्रोत: Prabhasakshi
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