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भारत-अमेरिका व्यापार गतिरोध समाप्त: ट्रंप के खास दूत सर्जियो गोर ने 21 दिनों में… India Us Trade Deadlock Resolved

International spotlight: Global update: महीनों से चली आ रही तनातनी और व्यापार युद्ध आखिरकार समाप्त हो गया है। भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर सहमति बन गई है, जिसने दोनों देशों के संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ा है। इस बड़ी सफलता के पीछे की कहानी में एक महत्वपूर्ण नाम सामने आता है – अमेरिका के राजदूत और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत सर्जियो गोर। उन्होंने भारत में कदम रखते ही महज 21 दिनों के भीतर इस जटिल टैरिफ विवाद को सुलझाकर सबको चौंका दिया।

यह जानना दिलचस्प है कि ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ क्यों कम किए, और इस पूरी डील के पीछे क्या रणनीतिक चालें थीं। तमाम पहलुओं पर चर्चा के साथ ही हम आपको बताएंगे कि कैसे ट्रंप के इस खास दूत ने भारत में अपनी उपस्थिति के कुछ ही हफ्तों में इस अहम व्यापार गतिरोध को खत्म कर दिया। पिछले 21 दिन वास्तव में बेहद निर्णायक साबित हुए। इन हफ्तों में भारत और अमेरिका के बीच शीर्ष स्तर पर कई महत्वपूर्ण बैठकें हुईं। दोनों देशों के मंत्रियों और अधिकारियों ने एक-दूसरे के देशों का दौरा किया और गहन बातचीत की। इन सभी मुलाकातों और वार्ताओं का केंद्रबिंदु सर्जियो गोर ही थे, जिनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।

सर्जियो गोर कौन हैं और उन्होंने इस समझौते को कैसे मूर्तरूप दिया, यह जानना आवश्यक है।

भारत में पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद, सर्जियो गोर ने स्पष्ट कर दिया था कि वे इस व्यापार समझौते पर चर्चा के लिए तैयार हैं। उनकी शुरुआती टिप्पणियों में उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच ‘सच्ची दोस्ती’ पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि ‘सच्चे दोस्त असहमत हो सकते हैं, लेकिन अंत में वे हमेशा अपने मतभेदों को सुलझा लेते हैं।’ इस बयान को दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण माहौल को कम करने और बातचीत का रास्ता खोलने वाला एक बड़ा संदेश माना गया था। गोर ने जिस कूटनीतिक कुशलता और गति के साथ काम किया, उसने दशकों पुराने व्यापार संबंधों को नई दिशा दी।

यह समझौता न केवल दोनों देशों के बीच टैरिफ संबंधी मुद्दों को हल करता है, बल्कि यह भविष्य में आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी के लिए एक मजबूत नींव भी रखता है। भारत और अमेरिका के बीच बेहतर व्यापार संबंध वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी सकारात्मक संकेत हैं, खासकर ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कई चुनौतियाँ मौजूद हैं। यह डील दिखाती है कि ठोस कूटनीति और दृढ़ इच्छाशक्ति से जटिल मुद्दों को भी आसानी से सुलझाया जा सकता है।

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  • सर्जियो गोर का जन्म नवंबर 1986 में उज़्बेकिस्तान में हुआ था, उनका परिवार 1999 में अमेरिका चला गया।
  • उन्होंने 2020 में ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ अभियान के दौरान डोनाल्ड ट्रंप के साथ काम करना शुरू किया।
  • 2024 में ट्रंप के सत्ता में आने के बाद, गोर को व्हाइट हाउस के राष्ट्रपति कार्मिक कार्यालय का निदेशक नियुक्त किया गया।
  • 38 वर्षीय गोर को जनवरी में भारत में अमेरिका के सबसे युवा राजदूत के रूप में भेजा गया था, जहाँ उन्होंने 21 दिनों में विवाद सुलझाया।
  • अपनी नियुक्ति के दौरान गोर ने भारत को एक रणनीतिक साझेदार बताया, जिसका भविष्य क्षेत्रीय और वैश्विक विकास को प्रभावित करेगा।

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स्रोत: Prabhasakshi

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