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भारत-ईरान चाबहार परियोजना: विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर अटकलों को … India Rejects Chabahar Pullout Rumors
साधनान्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने ईरान के चाबहार बंदरगाह परियोजना से पीछे हटने की अटकलों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है, जिससे भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि चाबहार से भारत के पीछे हटने की खबरें निराधार हैं।
भारत सरकार इस महत्वपूर्ण परियोजना पर अमेरिका के साथ लगातार संपर्क में है।
प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि 25 अक्टूबर 2005 को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा ईरान से संबंधित कुछ प्रतिबंधों में दी गई छूट, जो 26 अप्रैल 2026 तक वैध है, के तहत ही भारत अमेरिका के साथ मिलकर काम कर रहा है।
हाल ही में आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत ने चाबहार से अपनी साझेदारी समाप्त कर दी है, जिसके बाद विपक्ष ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए थे।
विदेश मंत्रालय ने चाबहार बंदरगाह के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह भारत के लिए बेहद अहम है।
यह परियोजना भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करती है, जिससे व्यापार और भू-राजनीतिक पहुंच में वृद्धि होती है।
प्रवक्ता ने यह भी कहा कि भारत और ईरान के ऐतिहासिक संबंध रहे हैं और भारत वहां की बदलती वैश्विक परिस्थितियों पर लगातार नजर बनाए हुए है।
भारत अपने हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने को प्रतिबद्ध है।
परियोजना में प्रत्यक्ष हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए भारत ने 120 मिलियन डॉलर की प्रतिबद्धता दोहराई है, जो इसके ग्लोबल रणनीतिक महत्व को दर्शाता है।
यह स्पष्टीकरण अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की विदेश नीति की दृढ़ता और उसके रणनीतिक लक्ष्यों की पूर्ति के प्रति प्रतिबद्धता को उजागर करता है।
- भारत ने चाबहार परियोजना से पीछे हटने की खबरों को नकारा, विदेश मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट की।
- अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की 2026 तक की छूट के तहत काम जारी है, भारत-अमेरिका संपर्क में हैं।
- चाबहार बंदरगाह भारत के लिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया कनेक्टिविटी हेतु बेहद महत्वपूर्ण है।
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Posted on 17 January 2026 | Visit साधनान्यूज़.com for more stories.
