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दिल्ली प्रदूषण: सीएम रेखा गुप्ता ने पिछली सरकारों पर साधा निशाना, बोलीं- अब बनेग… Cm Gupta Slams Past Govts

Country spotlight: National update: दिल्ली में वायु प्रदूषण और यमुना नदी की बिगड़ती स्थिति पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पिछली सरकारों को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ये गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियां पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की वर्षों की उपेक्षा और दूरगामी सोच के अभाव का नतीजा हैं। गुप्ता ने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार अब इन समस्याओं के समाधान के लिए एक व्यापक और दीर्घकालिक नीति तैयार कर रही है।

एक विशेष साक्षात्कार में मुख्यमंत्री गुप्ता ने पूर्व में अपनाए गए उपायों जैसे ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP), ऑड-ईवन प्रणाली, कृत्रिम वर्षा और विभिन्न प्रदूषण रोधी उपकरणों की प्रभावहीनता पर की जा रही आलोचनाओं को खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये कदम कभी भी स्थायी समाधान की दिशा में नहीं थे, बल्कि केवल तात्कालिक राहत प्रदान करने और जनता का ध्यान भटकाने के लिए थे। रेखा गुप्ता ने इस बात पर विशेष बल दिया कि प्रदूषण की समस्या को केवल हवा साफ करने के सीमित नजरिए से देखने से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलेंगे। उनके अनुसार, एक व्यापक और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना होगा, जिसमें धूल नियंत्रण, वायु गुणवत्ता प्रबंधन और यमुना नदी के शुद्धिकरण के लिए जल प्रबंधन – इन तीनों प्रमुख पहलुओं पर एक साथ, समग्रता से काम करना ही वास्तविक और स्थायी समाधान की कुंजी है।

आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर निशाना साधते हुए, गुप्ता ने गंभीर आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने बुनियादी ढांचागत सुधारों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, केवल अस्थायी राहत उपायों और प्रचार-प्रसार पर अधिक भरोसा किया। उन्होंने समझाया कि सड़कों पर स्प्रिंकलर चलाने, एंटी-स्मॉग गन का उपयोग करने और धुंध का छिड़काव करने जैसे उपाय केवल थोड़े समय के लिए ही प्रदूषण के स्तर में मामूली कमी लाते हैं, जबकि मूल समस्या जस की तस बनी रहती है। मुख्यमंत्री का मानना है कि वास्तविक और प्रभावी कार्य धूल नियंत्रण के लिए ठोस नीतियां बनाने, सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को अत्याधुनिक और कुशल बनाने और एक दूरदर्शी, दीर्घकालिक शहरी नियोजन को लागू करने पर होना चाहिए था, जिसे दुर्भाग्यवश नजरअंदाज किया गया। उन्होंने दिल्ली के वायु प्रदूषण के मुख्य कारणों में वाहनों से निकलने वाले अत्यधिक धुएं, सड़क की धूल के उड़ने और अपशिष्ट प्रबंधन में गंभीर कुप्रबंधन को बताया। इन गंभीर कारकों के संयोजन के कारण राजधानी में सर्दियों के महीनों में अक्सर वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में बनी रहती है, जिससे निवासियों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।

गुप्ता ने यह भी रेखांकित किया कि जहां वाहनों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण का एक प्रमुख और सर्वव्यापी कारण है, वहीं सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को उस स्तर तक विकसित नहीं किया गया, जिसकी दिल्ली जैसे महानगर को वास्तव में आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को ‘शून्य उत्सर्जन’ की ओर ले जाने के लिए एक चरणबद्ध और महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इस योजना के तहत, न केवल मौजूदा बेड़े को अपग्रेड किया जाएगा, बल्कि भविष्य में सभी नए वाहन 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिक और स्वच्छ ईंधन पर आधारित होंगे। मुख्यमंत्री ने बताया, ‘जब हमने सत्ता संभाली, तो हमारी प्राथमिकता थी कि दिल्ली का सार्वजनिक परिवहन शत-प्रतिशत इलेक्ट्रिक और स्वच्छ ईंधन पर आधारित होना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा मिल सके।’ यह दूरगामी दृष्टिकोण न केवल प्रदूषण के स्तर को नाटकीय रूप से कम करेगा, बल्कि दिल्ली को एक हरित, स्वस्थ और अधिक टिकाऊ भविष्य की ओर भी अग्रसर करेगा। उन्होंने दिल्लीवासियों से इस परिवर्तन में सहयोग की अपील भी की।

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  • मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली प्रदूषण को पिछली AAP सरकार की ‘विरासत में मिली समस्या’ बताया।
  • उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर वर्षों की उपेक्षा और अल्पकालिक नीतियों का आरोप लगाया।
  • गुप्ता ने GRAP, ऑड-ईवन जैसे उपायों को ‘अस्थायी राहत’ कहकर खारिज किया, स्थायी समाधान पर जोर दिया।
  • दिल्ली के मुख्य प्रदूषण कारणों में वाहन उत्सर्जन, सड़क की धूल और खराब कचरा प्रबंधन शामिल हैं।
  • नई सरकार ने सार्वजनिक परिवहन को 100% इलेक्ट्रिक और स्वच्छ ईंधन आधारित बनाने की चरणबद्ध योजना बनाई है।
  • मुख्यमंत्री ने प्रदूषण से निपटने के लिए धूल, हवा और पानी पर समग्र दृष्टिकोण अपनाने की वकालत की।

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स्रोत: Prabhasakshi

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